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हॉट चाची की चुदाई Chachi ne mera lund liya.

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सेक्सी चाची जी ने चुदवाया
सेक्सी चाची जी

Chachi ne mera lund liya.

हेलो मेरा नाम मनिंदर है और मैं पंजाब का रहने वाला हु. मैं इस सेक्स वेबसाइट का रेगुलर रीडर हु और मैंने बहुत सारी कहानिया यहाँ पर पड़ी है. मैंने सोचा, क्यों ना मैं भी अपनी एक स्टोरी यहाँ पर लिखू.. ये स्टोरी मेरे और मेरी चाची के बीच हुए सेक्स की है. जो मैं आज आप लोगो के साथ शेयर करने जा रहा हु. ये स्टोरी बिलकुल सच्ची है और अगर कोई गलती मुझ से हो जाए, तो मुझे माफ़ कर दीजियेगा प्लीज. उनका का नाम रानी है. यहाँ मैंने कुछ कारण ने उनका नाम चेंज कर दिया है. वो एक हाउसवाइफ है और मेरे चाचा एक गवर्नमेंट जॉब करते है. मेरी चाची का फिगर ३६ – ३२ – ३८ का है (ये मैंने बाद में चेक किया था) और वो ५.४ फिट की है. उनका रंग गोरा है और वो बहुत ही सेक्सी है.
अब मैं अपने बारे में बता दू कि मैं ६ फिट लम्बा हु और मेरा लंड ६ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा है. मैं एकदम सच बोल रहा हु. आप यकीं मानिये. अगर कोई मुझसे चुदवाने के लिए उत्सुक है और तो वो मुझे बता सकता है. मुझपर सेक्स सेक्स का बूथ सवार है और मैं रोजाना ही मुठ मारता था. रोज कोई नया काम करने की सोचता और एक दिन मैं घर में अकेला था और मैं ब्लूफिल्म देख कर मुठ मार रहा था. फिर मेरा अपने कमरे में पड़े बिस्तर की तरफ ध्यान गया और मैंने मन में सोचा, कि कुछ नया क्यों ना किया जाए. मैंने अभी बिस्तर को ऊपर नीचे से जोड़ कर चूत का आकर बना दिया और उसने लंड डाला और एकदम मजे दार लगा और मैं जोर – जोर से चोदने लगा और मुझे पता ही नहीं चला, कि मैं कब झड गया और २ मिनट वैसे ही पड़ा रहा. जब मेरे लंड में जलन महसूस होने लगी, तो मैंने लंड को बिस्तर में से निकाला, तो देखा कि मेरा लंड एकदम से फुलकर लाल हो चूका था.
जब मैंने बिस्तर में देखा, तो मेरा सफ़ेद पानी बिस्तर में लगा था. तो मैंने जल्दी से कपड़े से बिस्तर को साफ़ कर दिया और मैंने अपने लंड को भी साफ़ किया. जब मैं थोड़ा सा लंड को टच करता, तो मुझे बहुत दर्द होने लगता. मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और दो दिन के बाद लंड मेरा ठीक हो पाया. जब मैं अपनी चाची के घर में गया, तो वो उस समय घर में नहीं थी. मैंने उनके बेटे से पूछा, कि वो कहाँ है? वो कहने लगा – वो खेतो में गयी हुई है. हम लोगो के गाँव में ज्यादातर लेडीज़ ही काम करती है. जब मैं खेत में गया, तो देखा – चाची खेत में नहीं थी. जब मैंने अच्छे से देखा, तो वो काम कर रही थी. अचानक से वो उठी और वो टट्टी करने आ गयी सरसों की फसल में. तो मैंने उसको पीछे से देखा छुप कर.. वो नीचे बैठी तो क्या बताऊ यारो… क्या मस्त गांड थी.. एकदम सफ़ेद… मोटी – मोटी और गोल – गोल. मैं देखता रहा और मैंने अपने नीचे देखा, तो मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था. मेरे पायजामे में तम्बू बन गया था. जब वो उठी तो पूरी नंगी गांड दिखी मुझे. जब वो चली गयी, तो वहां गया जहाँ पर वो टट्टी के लिए बैठी थी और मैंने वहां कर मुठ मारी. मैंने अपने पानी को उनकी टट्टी पर झाड़ दिया. फिर मैं खेतो से बाहर आया. तो वो तब तक घर वापस जा चुके थी.
मैंने घर आ कर अपने लंड पर तेल लगाया और फिर लंड तन गया और मैंने मेडिकल शॉप से कंडोम ले आया और फिर लंड पर चढ़ाया और एक पोलीथिन को बिस्तर में डाल दिया और थूक लगा कर उसको बिस्तर पर चोदने लगा. क्या बताऊ यार, मुझे कितना मज़ा मिल रहा था.. मैंने बिस्तर को पुरे आधा घंटा चोदा और फिर मैं झड़ गया. बहुत मज़ा आया (बॉयज एक बार जरुर ट्राई करे) और कुछ दिन तक ऐसे ही चला और एक दिन मैं ऐसे ही बिस्तर चोद रहा था, कि अचानक से चाची आ गयी कमरे में. मैं बिस्तर में लंड डाल कर उनके नाम लेकर चोद रहा था. मुझे नहीं पता था, कि चाची मुझे देख रही थी और मैं मजे से बिस्तर को चोद रहा था और फिर कुछ देर बाद मैं झड गया. वो देखती रही, कि मैं उनका नाम लेकर झड़ रहा हु. फिर मैंने अपने लंड को बिस्तर से निकाला और देखा कि मेरा कंडोम पूरी तरह से मेरे वीर्य से भर गया था. वो मुझसे बिना कुछ कहे वापस चली गयी और मुझे तो पता ही नहीं चला, कि वो कब आई और कब चली गयी. वो मेरे कमरे में आई थी और उन्होंने मुझे उनका नाम लेकर बिस्तर को चोदते हुए देखा था, ये मुझे बाद में पता चला. मैंने जल्दी से कंडोम उतारा और बाहर फेंक दिया. उसके बाद जब मैं चाची के घर पर गया, तो चाची मुझे गुस्से दे देख रही थी. मैं सोचने लगा, कि क्या बात हो गयी? फिर मैंने सोचा – कि घर में काम को लेकर कोई बात हो गयी होगी. मैं वापस चला आया. कुछ देर बाद चाची का बेटा वही कंडोम उठा कर साफ़ करके चाची से पूछता है (अपने माँ से) – मम्मी ये क्या है? मैं वहीँ था. चाची बोलने लगी – फेंक इसे, गन्दी चीज़ है ये. मैं वहां खड़ा हुआ सुन रहा था. मैंने भी मजाक में कह दिया.. फेक दे.. यूज़ किया हुआ गुब्बारा है.
मेरी बात सुन कर चाची का बेटा उसको फुलाने लगा और चाची ने उसको उस से छिन कर फेंक दिया. मैंने – क्यों फेंक दिया? वो गुस्से से देखने लगी और जब मैं जानबुझ कर ये पूछने लगा, तो वो कहने लगी – इतने भोले मत बनो. मैंने कहा – सच में. चाची मुझे नहीं पता. वो कहने लगी – मैंने सब देख लिया था. तू जो कर रहा था ना. अपने घर में, बिस्तर के साथ. तू कितना गन्दा है. मैं एकदम से हैरान हो गया और कुछ बोल नहीं पा रहा था. मैंने सोरी बोला. वो कहने लगी, तू मेरा नाम बार – बार क्यों ले रहा था. मैं कुछ नहीं बोला. चाची ने कहा – तेरी मम्मी को बताना पड़ेगा. मैं रोने लगा और कहने लगा, कि मैंने चूत नहीं देखी है ना.. मुझे सेक्स का बहुत शौक है.. प्लीज चाची एक बार चूत दे दो ना.. प्लीज चाची.. प्लीज प्लीज से दो ना… वो कहने लगी – अब तो मैं तुम्हारी माँ को जरुर बताउंगी. मैं भीग मांगने लगा, चूत तो मिल ही नहीं रही थी ना.
फिर कुछ दिन बीत गये और मैं मुठ मार रहा था. तो चाची आई मेरे पास और कहने लगी, तू ऐसे नहीं मानेगा. तो चाची को मैंने कहा – तुम एक बार मुझे चूत दे दो. मैं ये सब छोड़ दूंगा. और मैं एकदम से उठ कर खड़ा हो गया. वो मेरे लंड को बार – बार घुर रही थी और सोचने लगी. मैंने फिर उनके मम्मे एक हाथ से पकड़ लिए और वो कहने लगी – ये क्या कर रहे हो? मैंने कहा – प्लीज चाची .. वो हट कर पीछे होने लगी. मैंने उनको पकड़ लिया और अपने लंड पर उनका हाथ लगवा दिया. उन्होंने हाथ पीछे हटा दिया और मैंने चाची की चूत पर हाथ रख दिए और उसको मसलने लगा. चाची अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सब बेकार था. मैंने उनके बूब्स के दानो को मसलना शुरू कर दिया था और चूत को. वो धीरे – धीरे गरम होने लगी और वो भी अब मेरा साथ देने लगी थी. मैंने उनको बेड पर लिटा दिया और उन्होंने सलवार सूट पहना हुआ था. मैंने पहले उनका सूट उतार दिया और सीधे बूब्स के दर्शन हुए. चाची ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी. मैं उन पर टूट पड़ा और उनके बूब्स पर.. वो अहः अहहाह अहहाह ऊओअओअओअ करके चिला रही थी. मैंने धीरे – धीरे चाची की सलवार उतार दी और चाची ने जल्दी से पेंटी भी उतार दी.
फिर मैं चूत को टच किया. पहली बार किसी चूत को टच किया था और मैं लिप किस करने लगा था. उन्हें किस नहीं करना आता था अच्छी तरह से. फिर मैं नीचे गया और मैं उनके पेट को किस करने लगा. फिर मैं नीचे और गया और उनकी चूत पर अपनी जुबान लगाई, तो वो कहने लगी – ये क्या कर रहे हो? ये गन्दी होती है. तो मैने कहा – चाची ये क्या आप पहली बार कर रही हो? वोकहने लगी – आज तक तुम्हारे चाचा ने नहीं चाटी है. तुम क्यों चाट रहे हो? मैंने कहा –आप देखती जाओ. कितना मज़ा दूंगा, कि याद रखूंगी. फिर मैं उनकी चूत को चाटने लगा. वो कहने लगी और मेरे सर को अपनी चूत में दबाने लगी अपने हाथो से. फिर मैंने अपनी एक ऊँगली डाल दी और आगे – पीछे करने लगा. कुछ देर बाद वो कांपने लगी और मेरे मुह में ही झड़ गयी. मैंने उनका सारा का सारा पानी पी लिया और वो बहुत खुश थी और कहने लगी – क्या बात है!
फिर मैंने कहा – चाची मेरा लंड मुह में डालो. वो नहीं मानी. फिर मैंने उनकी टाँगे अपने कधो पर रख ली. फिर अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा. चाची कहने लगी, जल्दी डालो… मैं लंड पर थूक लगाया और चूत पर टिका कर धक्का लगाया. तो मेरा लंड फिसल गया और फिर उन्होंने अपने हाथो से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत के निशाने पर रखा और मैंने फिर धीरे से धक्का लगाया. तो मेरा लंड आधा गया चला गया. चाची अहः अहहाह अहहाह करने लगी. फिर मैंने जोर से एक और धक्का मारा और मेरा सारा लंड अन्दर चला गया. फिर मैंने उन्हें चोदना शुरू कर दिया और कुछ देर बाद हाहाहा अहहाह अहहाह अहहाह निकलने लगी.
चाची की कामुक सिसकियो के बीच मैं उनकी चूत में महसूस किया, कि वो झड़ चुकी थी. फिर मैंने उन्हें और भी जोर से चोदना शुरू कर दिया. मेरा भी निकलने वाला था और मैंने बोला – रानी बोलो, कहाँ निकालना है? वो बोली – अन्दर ही निकाल दो. फिर मैंने अपने लंड को जोर – जोर से अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. उनके मुह से कामुक सिस्कारिया निकल रही थी आहाहा अहः अहहाह ऊहोहोह ऊऊओ अहहहः… मेरे लंड बहुत जोर से उनकी चुदाई कर रहा था और बहुत तेजी से अन्दर बाहर जा रहा था. कुछ देर जोरदार चुदाई करने के बाद, मैं उनकी चूत में ही झड़ गया. फिर हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे और फिर हमने साफ़ किया और हमने कपड़े पहने और फिर मैं कहा – आओ चाची कुछ दिखा दू. मैंने अपना पीसी ओन किया और चाची को ब्लूफिल्म दिखाने लगा. चाची बड़े ही गौर से ब्लूफिल्म देख रही थी और जिस तरीके से वो दो किस कर रहे थे. चाची हसने लगी. मैंने हर विडियो दिखाए सेक्स के चाची को और हर पिक जो भी मेरे पीसी में थी. चाची फिर से गरम हो गयी और हमने जल्दी से कपड़े उतारे और मैंने उनको लंड चूसने को बोला.
इस बार वो मान गयी और जब चाची ने इस बार मेरे लंड को अपने मुह में रखा, तो मुझे लगा कि मैं जन्नत में पहुच गया हु. क्या मस्त चूस रही थी बिलकुल लालीपॉप की तरह. क्या बताऊ यारो… कितना मज़ा आ रहा था. वो मेरे लंड को चूस रही थी. फिर मैंने उसकी गांड को मसलना शुरू कर दिया. मैं चाची के चुतड को चूमने लगा. वो बोलने लगी.. गांड नहीं चाटोगे? मैंने कहा नहीं. फिर मैं नीचे लेट गया और उनको मैंने अपने ऊपर आने को कहा. गांड के होल में मैंने अपने लंड को लगाया और चाची ने धीरे – धीरे मेरे लंड के ऊपर होकर नीचे बैठने लगी. मेरा लंड मोटा होने की वजह से अन्दर नहीं जा रहा था. बार – बार साइड में फिसल गया था. मैंने फिर से ट्राई किया और इस बार लंड चला गया (चाचा भी कभी – कभी लंड चाची की गांड में डालते थे).
फिर कुछ देर बाद, मैं झड़ गया और फिर मैं चूत की तरफ बढ़ा. इतने में चाची के बच्चे आ गया और हमने अपना सेक्स बीच में ही छोड़ना पड़ा. तो दोस्तों, आप सब को मेरी कहानी कैसी लगी.. आप कमेंट से जरुर बताना…
बुआ को नंगा कर के गांड मारी Bua ko nanga kar ke gaand mari

बुआ को नंगा कर के गांड मारी Bua ko nanga kar ke gaand mari

मेरी बुआ की हॉट गांड में लंड दिया मैंने
मेरी बुआ की हॉट गांड

मै उमेश हू ऑर पंजाब का रहने वाला हू. मेरी उमर 20 साल है और हाईट 6 फुट है. जीम जाता हू तो हेल्‍दी बॉडी है. लंड 6.5 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है. तो अब सीधा कहानी पर आता हू !! ये कहानी मेरी और मेरी बुआ की है. मेरी बुआ की फिगर 36 30 38 है. उनकी उमर 39 साल है. वो अक्‍सर मेरे घर आया करती थी. मेरी उनपर कभी गंदी नजर नही थी लेकिन. गर्मी की मेरी छुट्टीया चल रही थी. मै घर पर ही रहता था. एक दिन बुआ अचानक मेरे घर आयी. मै बहुत खुश हुआ था. उन्‍होंने लाल रंग का सुट पहने था जो कि बहुत टाईट था. उनके चुचे बाहर आने को तडप रहे थे. उनकी बडी गांड तो क्‍या बताऊ दोस्‍तों ! देख के पागल सा हो गया! क्‍या गांड थी … बहुत मोटी और जब वो चलती तब उनके बुब्‍स और गांड उपर निचे उछलती. मेरा तो देख के लंड ही खडा हो गया !!

अगले दिन बुआ मेरे कमरे मे सफाई करने आई लेकिन मै सो रहा था. मै अक्‍सर अंडरवेअर या शॉर्ट मे ही सोता हू ! जैसे ही बुआ मेरे कमरे मे आई तो मेरी निंद खूल गई लेकिन मै सोने का नाटक करता रहा. मैने देखा बुआ झूक झूक के झाडु लगा रही थी. उनके गोरे गोरे और बडे बडे चूचे मूझे साफ दिख रहे थे! बुआ के चुचे उनकी कुर्ती मे झुल रहे थे ये देख कर मेरा लंड खडा हो गया !! मै चाह कर भी कुछ नही कर सकता था ! फिर अचानक बुआ की नजर मेरे खडे लंड पर पडी. वो मेरे करीब आई और मेरे लंड को सहलाने लगी और सहलाने के साथ सिसका भी रही थी. मेरे अंदर तो मानो लड्डू फुट रहे थे. मेरा मन उनको पडककर चोदने को किया लेकिन मैने हलकी सी हरकत की और बुआ घबराकर चली गई ! मै समझ गया की वो चुदने को बेताब है. शाम हुई तो मै बुआ को ढूंढने लगा. वो बालकनी पर खडी थी उनकी पीठ मेरी तरफ थी. उनकी मोटी गांड को देख के मै पागल सा हो गया. क्‍या मोटी गांड थी कोई भी उनकी फिगर को देख के मुठ मार देगा !!
मेरा भी लंड खडा हो गया !! और मै उनकी ओर पीछे से बढा और चौकाने के लिये कंधे पर हात रख दिया!! वो डर कर पिछे हुई तो उनकी गांड मेरे लंड से टकरा गई. मेरे लोहे जैसे लंड से टकराकर उनकी चिख निकल गई… मै तो खुश हो गया. वो बिना कुछ बोले अपने रूम मे चली गई. अगली शाम घर मे बुआ और सिर्फ मै था. मै उन्‍हे सोचके मुठ मारने बाथरूम गया लेकिन दरवाजा बंद करना भूल गया. बुआ अचानक बाथरूम मे घूस गई. मुझे मुठ मारते देख वो हैरान हो गई. और वही खडी हो गई. मैने अपना लंड जिन्‍स के अंदर डाल दिया. और बुआ को कहा सॉरी बुआ एैसा आईंदा नही होगा. प्‍लीज किसी को बताना मत आप जो बोलोगी मै करने को तैय्यार हु !!! बुआ ने कहा फिर जैसे मै कहुंगी तुम करोगे ?? मैने हॉं कर दी !! बुआ ने बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया और मुझे कहा जिन्‍स उतार दो !! मुझे बहुत शरम आयी.
मैने कहा बुआ मै ऐसे नही कर सकता. बुआ ने कहा उतारो वरना मै सबको बता दुंगी. मैने अपनी जिन्‍स उतार दी. बुआ मेरे पास आयी और मेरी अंडरवेअर पर हात फेरने लगी. मैने कहा बुआ नही ये क्‍या कर रहे हो!! फिर उन्‍होने मुझे किस करना शुरू किया. मेरा भी मुड बनना शुरू हो गया और लंड भी खडा हो गया !!! बुआ मुझे किस कर रही थी. उनकी जीभ मेरी जीभ से टकरा रही थी. किस करते करते मैने उनके बाल पकड लिये और उनके होठों का रस चूसने लगा. वो साथ साथ मेरे लंड को सहला रही थी. बुआ फिर अपने मुह से मेरी शर्ट की बटन खोलने शुरू कीया !! उनकी गरम सासे मुझे और गरम कर रही थी और उनके होठ मेरी छाती को छू रहे थे. मैने भी उनके चूचे प्रेस की और मसलने लगा !! इतने बडे चूचे और मूलायम की मेरे हाथ मे समा नही रहे थे. मै बुआ के गोरे गोर चूचो को मसल रहा था. वो सिसकिया लेने लगी. आहहहहहह उफफफफ उममममम मममम अममम मम
मैने उनकी कुर्ती मे हाथ डाल दिया चुचों को और जोस से मसलने लगा !!बुआ पूरी तरह गरम हो चुकी थी ! उन्‍होने मेरा लंड पकडा और मुह मे ले लिया. वो घुटनो पे बैठके मेरे लंड को पूरा अंदर तक लेने की कोशीश कर रही थी. मै उनका सर पकडकर लंड आगे पिछे करने लगा. बुआ अममम अममम अममम करने लगी. मै अब गरम हो गया था. मैने उनकी कुर्ती उतार दि. क्‍या बताऊ दोस्‍तो. उनका गोरा बदन और बडे बडे कडक चूचे देख के मजा आ गया. अब वो मेरे सामने नंगी खडी थी. मैने उनकी कमर पकडी और अपने तरफ खिंचा. उनके चुचे मेरी छाती से दब रहे थे. मै उन्‍हे किस करने लगा और साथ ही साथ पिठ पे हाथ घुमा रहा था.
5-7 मिनट किस करने के बाद उन्‍होने अपनी सलवार उतार दी. उन्‍होंने पॅन्‍टी पहन रखी थी. मै उनकी गुलाबी चूत देखते रह गया. मुझसे रहा नही गया. मैने उन्‍हे दिवास टिकाया और शॉवर चला दिया. पानी की बुंदे उनकी चिकनी पिठ और झुलते चुचों से टपक रही थी.
यह देखकर मेरा लंड फटने को आ गया. मैने उनकी चुत पर हाथ मारा ताकी उनकी चुत और टाईट हो जाये. फिर मैने अपना मोटा लंड उनकी चुत पर रखा तो बुआ बोली मनिष और मत तडपाओ. मैने एक झटके मे आधा लंड अंदर दिया तो चिख पडी अहहहह मनिष हहूह. एक और झटके मे लंड पूरा अंदर दे दिया. वो दर्द से चिल्‍ला रही थी. मुझसे और रहा नही गया और पागलो की तरह बुआ को पीठ पकड कर चोदने लगा. बुआ बोलती रही धीरे धीरे. पर मै नही रूका और जोर से झटके मारते रहा. बुआ अहहहह आहहहह आहहहह मै मर गई … आहहहह…. आहहह….. अह….. उफ….. उफ अममम चिल्‍लाती रही… फिर मैने अपने लंड पे क्रिम लगाई और बुआ के गांड मे लंड पेल दिया. बुआ के आसू आये और आ आहह मनिष धीरे से अमम बोलती रही. मैने धक्‍के मारने चालू रखे. उनके लटकते गोरे गोरे चुचों को पकड लिया और चोदने लगा. मैने बुआ की गांड मार मार कर लाल कर दी.
अब हम दोनो झड रहे थे. बुआ ने मुझे लंबी किस की और कहा अब हम हमेशा सेक्‍स किया करेंगे. फिर मैने नहाते नहाते उनके चुचे चुसे और किस किया. बुआ से दो दिन तक चला नही गया. क्‍योंकि मैने उनकी गांड बहुत जोर से और बहुत देर तक मारी. उम्‍मीद करता हु आपको मेरी कहानी बहुत अच्‍छी लगी होगी
बुआ को नंगा कर के गांड मारी

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मेरी बुआ की हॉट गांड में लंड दिया मैंने मेरी बुआ की हॉट गांड Bua ko nanga kar ke gaand mari मै उमेश हू ऑर पंजाब का रहने वाला हू. मेरी उमर 20 साल है और हाईट 6 फुट है. जीम जाता हू तो हेल्‍दी बॉडी है. लंड 6.5 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है. तो अब सीधा कहानी पर आता हू !! ये कहानी मेरी और मेरी बुआ की है. मेरी बुआ की फिगर 36 30 38 है. उनकी उमर 39 साल है. वो अक्‍सर मेरे घर आया करती थी. मेरी उनपर कभी गंदी नजर नही थी लेकिन. गर्मी की मेरी छुट्टीया चल रही थी. मै घर पर ही रहता था. एक दिन बुआ अचानक मेरे घर आयी. मै बहुत खुश हुआ था. उन्‍होंने लाल रंग का सुट पहने था जो कि बहुत टाईट था. उनके चुचे बाहर आने को तडप रहे थे. उनकी बडी गांड तो क्‍या बताऊ दोस्‍तों ! देख के पागल सा हो गया! क्‍या गांड थी … बहुत मोटी और जब वो चलती तब उनके बुब्‍स और गांड उपर निचे उछलती. मेरा तो देख के लंड ही खडा हो गया !! अगले दिन बुआ मेरे कमरे मे सफाई करने आई लेकिन मै सो रहा था. मै अक्‍सर अंडरवेअर या शॉर्ट मे ही सोता हू ! जैसे ही बुआ मेरे कमरे मे आई तो मेरी निंद खूल गई लेकिन मै सोने का नाटक करता रहा. मैने देखा बुआ झूक झूक के झाडु लगा रही थी. उनके गोरे गोरे और बडे बडे चूचे मूझे साफ दिख रहे थे! बुआ के चुचे उनकी कुर्ती मे झुल रहे थे ये देख कर मेरा लंड खडा हो गया !! मै चाह कर भी कुछ नही कर सकता था ! फिर अचानक बुआ की नजर मेरे खडे लंड पर पडी. वो मेरे करीब आई और मेरे लंड को सहलाने लगी और सहलाने के साथ सिसका भी रही थी. मेरे अंदर तो मानो लड्डू फुट रहे थे. मेरा मन उनको पडककर चोदने को किया लेकिन मैने हलकी सी हरकत की और बुआ घबराकर चली गई ! मै समझ गया की वो चुदने को बेताब है. शाम हुई तो मै बुआ को ढूंढने लगा. वो बालकनी पर खडी थी उनकी पीठ मेरी तरफ थी. उनकी मोटी गांड को देख के मै पागल सा हो गया. क्‍या मोटी गांड थी कोई भी उनकी फिगर को देख के मुठ मार देगा !! मेरा भी लंड खडा हो गया !! और मै उनकी ओर पीछे से बढा और चौकाने के लिये कंधे पर हात रख दिया!! वो डर कर पिछे हुई तो उनकी गांड मेरे लंड से टकरा गई. मेरे लोहे जैसे लंड से टकराकर उनकी चिख निकल गई… मै तो खुश हो गया. वो बिना कुछ बोले अपने रूम मे चली गई. अगली शाम घर मे बुआ और सिर्फ मै था. मै उन्‍हे सोचके मुठ मारने बाथरूम गया लेकिन दरवाजा बंद करना भूल गया. बुआ अचानक बाथरूम मे घूस गई. मुझे मुठ मारते देख वो हैरान हो गई. और वही खडी हो गई. मैने अपना लंड जिन्‍स के अंदर डाल दिया. और बुआ को कहा सॉरी बुआ एैसा आईंदा नही होगा. प्‍लीज किसी को बताना मत आप जो बोलोगी मै करने को तैय्यार हु !!! बुआ ने कहा फिर जैसे मै कहुंगी तुम करोगे ?? मैने हॉं कर दी !! बुआ ने बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया और मुझे कहा जिन्‍स उतार दो !! मुझे बहुत शरम आयी. मैने कहा बुआ मै ऐसे नही कर सकता. बुआ ने कहा उतारो वरना मै सबको बता दुंगी. मैने अपनी जिन्‍स उतार दी. बुआ मेरे पास आयी और मेरी अंडरवेअर पर हात फेरने लगी. मैने कहा बुआ नही ये क्‍या कर रहे हो!! फिर उन्‍होने मुझे किस करना शुरू किया. मेरा भी मुड बनना शुरू हो गया और लंड भी खडा हो गया !!! बुआ मुझे किस कर रही थी. उनकी जीभ मेरी जीभ से टकरा रही थी. किस करते करते मैने उनके बाल पकड लिये और उनके होठों का रस चूसने लगा. वो साथ साथ मेरे लंड को सहला रही थी. बुआ फिर अपने मुह से मेरी शर्ट की बटन खोलने शुरू कीया !! उनकी गरम सासे मुझे और गरम कर रही थी और उनके होठ मेरी छाती को छू रहे थे. मैने भी उनके चूचे प्रेस की और मसलने लगा !! इतने बडे चूचे और मूलायम की मेरे हाथ मे समा नही रहे थे. मै बुआ के गोरे गोर चूचो को मसल रहा था. वो सिसकिया लेने लगी. आहहहहहह उफफफफ उममममम मममम अममम मम मैने उनकी कुर्ती मे हाथ डाल दिया चुचों को और जोस से मसलने लगा !!बुआ पूरी तरह गरम हो चुकी थी ! उन्‍होने मेरा लंड पकडा और मुह मे ले लिया. वो घुटनो पे बैठके मेरे लंड को पूरा अंदर तक लेने की कोशीश कर रही थी. मै उनका सर पकडकर लंड आगे पिछे करने लगा. बुआ अममम अममम अममम करने लगी. मै अब गरम हो गया था. मैने उनकी कुर्ती उतार दि. क्‍या बताऊ दोस्‍तो. उनका गोरा बदन और बडे बडे कडक चूचे देख के मजा आ गया. अब वो मेरे सामने नंगी खडी थी. मैने उनकी कमर पकडी और अपने तरफ खिंचा. उनके चुचे मेरी छाती से दब रहे थे. मै उन्‍हे किस करने लगा और साथ ही साथ पिठ पे हाथ घुमा रहा था. 5-7 मिनट किस करने के बाद उन्‍होने अपनी सलवार उतार दी. उन्‍होंने पॅन्‍टी पहन रखी थी. मै उनकी गुलाबी चूत देखते रह गया. मुझसे रहा नही गया. मैने उन्‍हे दिवास टिकाया और शॉवर चला दिया. पानी की बुंदे उनकी चिकनी पिठ और झुलते चुचों से टपक रही थी. यह देखकर मेरा लंड फटने को आ गया. मैने उनकी चुत पर हाथ मारा ताकी उनकी चुत और टाईट हो जाये. फिर मैने अपना मोटा लंड उनकी चुत पर रखा तो बुआ बोली मनिष और मत तडपाओ. मैने एक झटके मे आधा लंड अंदर दिया तो चिख पडी अहहहह मनिष हहूह. एक और झटके मे लंड पूरा अंदर दे दिया. वो दर्द से चिल्‍ला रही थी. मुझसे और रहा नही गया और पागलो की तरह बुआ को पीठ पकड कर चोदने लगा. बुआ बोलती रही धीरे धीरे. पर मै नही रूका और जोर से झटके मारते रहा. बुआ अहहहह आहहहह आहहहह मै मर गई … आहहहह…. आहहह….. अह….. उफ….. उफ अममम चिल्‍लाती रही… फिर मैने अपने लंड पे क्रिम लगाई और बुआ के गांड मे लंड पेल दिया. बुआ के आसू आये और आ आहह मनिष धीरे से अमम बोलती रही. मैने धक्‍के मारने चालू रखे. उनके लटकते गोरे गोरे चुचों को पकड लिया और चोदने लगा. मैने बुआ की गांड मार मार कर लाल कर दी. अब हम दोनो झड रहे थे. बुआ ने मुझे लंबी किस की और कहा अब हम हमेशा सेक्‍स किया करेंगे. फिर मैने नहाते नहाते उनके चुचे चुसे और किस किया. बुआ से दो दिन तक चला नही गया. क्‍योंकि मैने उनकी गांड बहुत जोर से और बहुत देर तक मारी. उम्‍मीद करता हु आपको मेरी कहानी बहुत अच्‍छी लगी होगी.
भाभी ने प्यारी चूत मुझसे चुदवा ली (Bhabhi Ne Pyari Chut Mujhse Chudwa Li)

भाभी ने प्यारी चूत मुझसे चुदवा ली (Bhabhi Ne Pyari Chut Mujhse Chudwa Li)

मेरा नाम कृष्ण है, मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ। मैं आपके साथ अपनी एक सच्ची कहानी शेयर करना चाहता हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं बारहवीं क्लास में पढ़ता था, मेरे भाई की शादी को तीन साल हो चुके थे। अपनी भाभी का सारा काम घर का भी, बाहर का भी मैं ही करता था। तब तक मुझे सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था। एक दिन मेरा एक दोस्त क्लास में सेक्स स्टोरी की बुक लेकर आया। खाली पीरियड में हम दोनों वो सेक्स स्टोरी वाली बुक पढ़ने लगे। मैंने उससे वो किताब घर के लिए देने को कहा तो वो मान गया। मैंने घर आकर वो बुक पढ़ी तो बुक पड़ने के बाद मुझे सेक्स के बारे में पता लगा। उस दिन के बाद से मैं अपनी भाभी को अलग नज़र से देखने लगा। उस समय ठंड के दिन थे तो मैं अपनी भाभी के साथ रज़ाई में बैठ कर टीवी देख रहा था तो मैंने भाभी से कहा- भाभी मुझे एक चीज़ देखनी है। तो वो बोली- टीवी का रिमोट तुम्हारे पास है, जो देखना है देख लो! मैंने भाभी से कहा- टीवी में नहीं है… वो तो आपके पास है। वो बोली- मेरे पास क्या है ऐसा जो तुम देखना चाहते हो? तो मैंने उनकी चूत की तरफ इशारा करके कहा- मैं इसे देखना चाहता हूँ। भाभी गुस्सा हो गई और मुझसे कहा- आने दो तेरे भाई को, उनको सब कुछ बता दूंगी। और मुझे कमरे से निकाल दिया। उसके बाद मैंने भाभी से डर के मारे कई दिनों तक बात नहीं की। फिर कई दिनों के बाद घर पर कोई नहीं था, मुझे स्कूल जाना था और भाभी नहा रही थी। भाभी ने मुझे तौलिया देने को कहा। मैंने जल्दी से भाभी को तौलिया दिया और ब्रेकफास्ट तैयार करने को कहा। भाभी बोली- तू उस दिन मेरी उसको देखना चाहता था? मैंने जल्दी से हाँ में सिर हिलाया। भाभी ने कहा- तू ऊपर वाले कमरे में चल, मैं कपड़े पहन कर आती हूँ। मैं ऊपर गया, पीछे पीछे भाभी आ गई और बेड पर लेट गई, भाभी बोली- मेरी सलवार खोल ले और देख ले… बस देखना ही, और कुछ मत करना। मैंने जल्दी से सलवार खोली और फ़िर उनकी कच्छी नीचे सरका के भाभी की चूत पर हाथ फेरने लगा। भाभी को मज़ा आने लगा। भाभी बोली- तुमने तो देख ली… अब मैं भी तुम्हारा कुछ देखना चाहती हूँ। मैं कुछ बोलता, उससे पहले ही भाभी ने मेरी पैंट कि चैन खोल दी और मेरा लंड कच्छे से बाहर निकाल कर हिलाने लगी। तब तक मेरा भी खड़ा हो चुका था। भाभी बोली- मैंने तुम्हारी विश पूरी की, अब तुम मेरी विश पूरी कर दो। तो मैं बोला- क्या विश है आपकी? आज आप जो भी मांगेंगी, वो मैं आपको दूँगा। भाभी बोली- मैं तुम्हारा यह लंड अपनी चूत में लेना चाहती हूँ। तो मैंने भाभी से कहा- कोई आ जाएगा तो? भाभी बोली- मैंने नीचे गेट की कुण्डी लगा दी है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! फिर भाभी बोली- जल्दी कर… तुझे स्कूल भी जाना है। मैंने अपनी पैंट नीचे की और बेड पे लेट गया। पहले भाभी ने मेरा लंड साफ किया और मुँह में लेकर चूसने लगी, मेरा लंड और लंबा और मोटा हो गया, इससे पहले मेरा लंड इतना लंबा कभी हुआ था। फिर भाभी ने अपने मुँह से लंड निकला, अपनी सलवार उतारी और मेरे ऊपर आ गई, मेरा लंड अपनी चूत पे सेट किया और बोली- ज़ोर से धक्का लगा! मैंने अपनी पूरी ताक़त लगाई और एक ही झटके में पूरा लंड भाभी की चूत में घुसा दिया। भाभी के मुख से ज़ोर की चीख निकल गई। मैं थोड़ा ऊपर हुआ और भाभी के होटों पे होंट रख कर चूसने लगा। भाभी अपनी चूत ऊपर नीचे करके मज़े ले रही थी। थोड़ी देर बाद भाभी बोली- मेरा होने वाला है! और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे होने लगी। तकरीबन 5 मिनट के बाद भाभी ज़ोर की आवाज़ ‘आई ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकाल के झड़ गई। अपनी चूत से लंड निकाल कर भाभी बोली- अब तुझे भी करना है क्या? करना है तो जल्दी से ऊपर आ जा। भाभी मेरे ऊपर से हट कर बेड पे लेट गई और मैं भाभी के ऊपर आ गया। फिर मैंने भाभी की चूत पे अपना लंड लगाया और अंदर बाहर करने लगा। उस समय सारा कमरा ‘आहह अहहा अह सस्सस्स’ की आवाज़ में गूँज रहा था। मैं 10 मिनट तक भाभी को चोदता रहा और भाभी भी नीचे से चूतड़ उठा उठा कर मज़े लेती रही। तब मैंने भाभी से कहा- भाभी, मेरा होने वाला है। तो भाभी बोली- बाहर मत निकालना, अंदर ही छोड़ दे। मैंने भाभी को कहा- कुछ होगा तो नहीं? तो भाभी बोली- कुछ नहीं होगा, बस जल्दी से कर ले। इतना कहते ही मैंने भाभी की चूत अपने वीर्य से भर दी। भाभी के चहरे पर एक अजब सी मुस्कान थी। उसके बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और साफ किया। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए। उसके बाद भाभी बोली- तुम्हारे लंड का साइज़ बिल्कुल परफ़ेक्ट है, मैं तो इस पर फिदा हो गई हूँ। अब जब भी मैं तुम्हें बोलूँगी तो तुम मुझे चोदोगे ना? मैंने हाँ में सिर हिलाते हुए जवाब दिया। तब तक मेरे स्कूल का टाइम हो चुका था, भाभी ने अपने पर्स से 50 रूपए निकाल कर मुझे दे दिए और मैं स्कूल चला गया। उस दिन के बाद भी मैंने भाभी को कई बार चोदा। आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल ज़रूर करिएगा, आपके विचारों का मुझे इंतज़ार रहेगा।
गोरियों के चंगुल में (Goriyon Ke Chakker mein

गोरियों के चंगुल में (Goriyon Ke Chakker mein

दोस्तो, मेरा नाम लीओन क्रूज़ है.. मैं अपने नखरों से जाना जाता हूँ.. बचपन में ही मेरे माँ-बाप गुजर गए.. लेकिन जाते-जाते अपने लाड़ले बेटे को एक पहलवान बना कर गए थे। जिसकी बदौलत मैं आज 70 हजार से एक लाख तक कमा लेता हूँ। मैं अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूँ, हालांकि उनमें से मुझे कुछ ही पसंद आई हैं। मेरी यह दूसरी कहानी है.. जो पूरी तरह से कल्पना है.. इसमें जो भी लिखूंगा वो काल्पनिक होगी.. क्योंकि मैंने ना ही किसी लड़की से शादी करनी है और ना ही उसके साथ सेक्स करना है.. क्यों.. मैं बताता हूँ। जब मैं छोटा था.. तब से एक सीधा-साधा और वफादार था.. पर जब मेरी नौकरी मियामी फ्लोरिडा में लगी.. तब से मैं कुछ सा बदल गया.. पर मुझे आज तक सेक्स पसंद नहीं था और न ही कभी किया था। अब आप लोग सोच रहे होंगे कि मैंने आज तक एक भी चूत नहीं देखी.. तो मैं पक्का ही ‘गे’ होऊँगा। है न.. पर ऐसा नहीं है.. मैं एक हॉट सेक्सी और आकर्षक लड़का हूँ। उस दिन जब मेरी नौकरी लगी.. उसके तक़रीबन एक साल बाद मैं वहाँ के माहौल में घुल-मिल गया और वहाँ की काफी सारी गोरियाँ मुझे लाइन देने लगीं और वे मुझे पाने की कोशिश करने लगी थीं.. पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैं बचपन से होनहार था। एक दिन एक लड़की ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की.. उसने किया यूँ कि जब मैं अपनी कुश्ती लड़ कर आया.. तो उसने और उसके साथ काफी सारी लड़कियाँ भी थीं.. उन सबकी नजर भी मुझ पर थी.. पर मैं सीधे अपने कमरे की तरफ जा रहा था। तभी पता नहीं शायद उन लड़कियों में शर्त लगी होगी कि आज इसे कौन छेड़ सकता है। तो उसमें से एक हॉट लड़की मेरे गले से लगी और मुझसे कहने लगी- किस मी.. प्लीज.. एंड कम विद मी! पर मैंने वैसा नहीं किया.. हालांकि मैं लड़कियों पर हाथ नहीं उठाता.. इसलिए मैंने उसे धक्का दे दिया और दूर कर दिया। लेकिन हद तो तब हुई जब वो मेरे पीछे-पीछे मेरे कमरे में आ गई। इस बात से मुझे बहुत गुस्सा आ गया। आप सोच रहे होंगे कि जब एक लड़की मिल गई.. तो साला ये लड़का भाग क्यों रहा है.. पर ऐसा नहीं है.. क्योंकि कुश्ती में हमें ऐसा कुछ करने की मनाही है। कुश्ती कराने वाले आयोजक कहते हैं.. इससे हमारा स्टैमिना उतर जाएगा.. इसलिए वो इस बात की मनाही करते हैं और वैसे भी मुझे सेक्स में कोई इंटरेस्ट नहीं था.। इसलिए भी मैं उससे दूर हो गया.. पर वो मेरे और करीब आई और मुझे पकड़ कर मेरे होंठों पर किस करने लगी और मुझे इतना जोर से पकड़ लिया.. जिससे मैं अकड़ सा गया था। मेरी फाइट के वजह से मैं बहुत थका हुआ था.. तो मैंने उसे फिर से अलग करना उचित समझा। वो किसी तरह मुझे किस कर पाई और उसने हद तब की.. जब उसने मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाना चालू किया। मेरा दिमाग ख़राब हुआ.. मैंने उसे दूर किया और ताकत लगाकर उसे दरवाजे से बाहर किया और दरवाजा बंद कर दिया। मैं अब आराम करने लगा। फिर मुझे एक हफ्ते की छुट्टी मिली.. तो मैं इस झंझट से कुछ फ्री हुआ। लेकिन यही नहीं.. जब अगले हफ्ते मेरी दूसरी फाइट थी.. और मैं वो फाइट जीत कर वापस आ रहा था.. तब जब मैंने उन लड़कियों को फिर से देखा.. तो उनके चेहरों पर एक अजीब सी अश्लील मुस्कान थी.. जो मुझे समझ नहीं आई। मैं उन्हें अनदेखा करके अपने घर की तरफ चल दिया और मैं थका हुआ था तो थोड़ा लेट गया। तभी वो लड़कियां आईं.. पता नहीं उनके भेजे में कौन सा प्लान था.. वे लोग एक बड़ी सी रस्सी लाई थीं और उन्होंने उस रस्सी से मेरे हाथ-पैर बांध दिए। मैं थका हुआ था.. तो कुछ नहीं कर सका। वो लोग पूरी योजना बना कर ही आई थीं, उन लोगों ने मुझे रस्सी से बांध दिया और पाँचों लड़कियाँ मेरे ऊपर चढ़ गईं और खुद को और मुझे नंगा कर दिया। अब वे मुझे यहाँ-वहाँ चूम रही थीं। मैं सच बता रहा हूँ कि उन्होंने क्या-क्या किया.. दो लड़कियाँ तो मेरे होंठों को ही चूम रही थीं.. एक मेरे लण्ड को चूस रही थी और एक तो मेरी छाती पर बैठ कर पूरा मुझे निगलने की फ़िराक में थी। एक के दिमाग में तो कुछ सूझ रहा था कि क्या करूँ और फिर उसने क्या किया कि एक लड़की को हटाया और फिर कुछ पलों बाद वे दोनों मिल कर
मेरा लण्ड चूसने लगीं। मैं चूंकि थका हुआ था.. तो कुछ नहीं कर पा रहा था। दो लड़कियाँ तो मुझे सांस ही नहीं लेने दे रही थीं.. मेरे होंठों से ऐसी चिपकी थीं कि जन्मों से किसी के होंठों को चुम्बन ही न लिया हो। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! जो दो मेरे नीचे थीं उनमें से एक ने मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत में घुसेड़ दिया और खुद ऊपर-नीचे होने लगी। मैं तो जैसे बस मर ही गया था। एक तो जिन्दगी में कभी चुदाई किया नहीं.. ऊपर से पांच-पांच चूतें.. बापरे.. मुझे तो समझ आ गया था कि आज मेरा स्टैमिना पूरा खत्म ही हो जाएगा। पर धीरे-धीरे मुझे अच्छा लगने लगा.. जब तक पूरे होश में आया.. तब तक दो लड़कियाँ मुझसे चुदवा चुकी थीं और बाकी तीन चुदने की राह देख रही थीं। मुझे ऐसा लगा कि मेरी थकावट थोड़ी दूर हुई और मैं फिर से अपने मूड में आ गया। अब मैंने पूरी ताकत से उस रस्सी को खींच कर तोड़ दिया और उन पांचों लड़कियों को अपने घर से उठा कर बाहर फेंक दिया.. वो भी नंगी अवस्था में फेंका था। दरवाजा बंद करके मुझे अफ़सोस हो रहा था कि मेरा शरीर अब अशुद्ध हो चुका है.. फिर मैं नहाने चला गया। मैं सोच रहा था कि अब क्या करूँ और तब से मैंने ठान लिया कि जो लड़की मुझसे प्यार करेगी.. मैं उसी को चोदूँगा.. आप सोच रहे होंगे कि पांच-पांच को छोड़ दिया.. पर यह मेरी फाइट और लाइफ का सवाल था.. इसलिए मैंने उन लड़कियों को खुद से दूर किया था। हालांकि यह भी सही है कि मेरे लण्ड को चूत का स्वाद मिल चुका था और तब से मुझे भी सेक्स में इंटरेस्ट आने लगा है। मैं ‘हार्ड सेक्स’ नहीं करता हूँ.. क्योंकि मैं उस ‘हार्ड सेक्स’ से अच्छा एक फाइट लडूं और तो 60 हजार तक कमा सकता हूँ.. पर मैं आज भी उन लड़कियों के साथ किस करता हूँ.. पर इससे अधिक कभी नहीं.. आप मुझे बताइए मैं क्या करूँ..? आपको यह सच कैसा लगा.. मुझे पता नहीं.. पर मेरी आगे की जो कहानियाँ होगीं.. वो आपको पक्का पसंद आएगीं.. क्योंकि आपको काल्पनिक कहानियाँ अच्छी लगती हैं.. मुझे पता है। यह कहानी कैसी लगी.. मुझे जरूर बताइएगा।
मुझे पहली बार जीजू ने चोदा (Mujhe Pahli Bar Jiju Ne Choda)

मुझे पहली बार जीजू ने चोदा (Mujhe Pahli Bar Jiju Ne Choda)

मेरा नाम नाज़नीन है, आज मैं आपको अपनी कहानी सुनाने जा रही हूँ की कैसे मुझे मेरे जीवन का पहला लण्ड मिला और कैसे उसने मुझे पहली बार चोदा। यह घटना घटी तब मैं बीस साल की थी, शादी नहीं हुई थी। अपने बारे में बता दूँ, पाँच फ़ीट चार इंच लम्बाई के साथ मेरा वजन है करीब 56 किलो, यानि कि मैं पतली लड़कियों में से तो नहीं हूँ, मेरा बदन भरा हुआ, मेरा रंग गोरा, बाल और आँखें काली हैं, चेहरा गोल है, ऊपर वाला होंठ जरा सा आगे उठा हुआ है और नीचे वाला मोटा है। मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि मेरे होंठ बहुत चूमनीय हैं। मेरे बदन में मेरा सबसे ज्यादा आकर्षक अंग है मेरे स्तन, जो मुझे देखता है उसकी नजर सबसे पहले मेरे स्तनों पर जम जाती है। 38 इन्च के मेरे उरोज एकदम गोल हैं, जरा भी झुके हुए नहीं हैं, मेरे स्तनाग्र छोटे हैं और बहुत संवेदनशील हैं। मेरा पेट दबा हुआ है लेकिन नितम्ब भारी और पीछे को उभरे हुए हैं। मेरे हाथ पाँव चिकने और नाजुक हैं। अब रह गई मेरी चूत की बात… मेर चूत के बारे में मैं अभी नहीं बताऊँगी। हुआ क्या कि मुझे अमदाबाद में MBA में प्रवेश मिला लेकिन रहने के लिये गर्ल होस्टल में तुरंत जगह ना मिल पाई। मुझे एक सेमेस्टर के लिये अपनी मौसेरी बहन फ़रज़ाना के घर रहना पड़ा। मैं आभारी हूँ अपनी बहन की जिसने मुझे आश्रय दिया और जिसकी वजह से मैंने अपने पहले orgasm का मज़ा लिया! मैं फ़रज़ाना आपा के साथ रहने चली आई। उसके शौहर यानि मेरे जीजू डॉक्टर आदिल अमदाबाद में अपनी क्लिनिक चलाते थे। वो आपा की फूफी के लड़के ही थे। आपा भी एक कम्पनी में जॉब करती थी। आपा और जीजू सेक्स के बारे में एकदम खुले विचारों के थे। आपा ने खुद मुझे कहा था कि कैसे आदिल के एक दोस्त सचिन को लण्ड खड़ा ना हो पाने की कुछ बिमारी थी और इलाज के जरिये कैसे आपा ने सचिन से चुदावाया था। अपने शौहर के सिवाये ग़ैर मर्द का वो पहला लण्ड था जो आपा ने लिया था। उसके बाद आपा ने अपने बॉस पर तरस खाकर उससे भी चुदवा लिया था। उसके बाद आपा और जीजू का कुछ लोगों के साथ एक ग्रुप बन गया था जो अक्सर ग्रुप चुदाई करते थे। नए मेंबर को पूरी छानबीन के बाद ही ग्रुप में शामिल किया जाता था। शुरू शुरू में शर्म के मारे मैं आपा और जीजू से दूर रही, ज्यादा बात भी नहीं करती थी। जीजू हर रोज मेरे उरोजों के साइज़ का अंदाज़ लगाते थे लेकिन कभी उन्होंने छेड़छाड़ नहीं की थी। आपा धीरे धीरे मेरे साथ बातें बढ़ाने लगी और कभी कभी सेक्सी नॉन वेज जोक्स भी सुनाने लगी। ऐसे ही एक मौक़े पर आपा ने मुझे बताया था कि चुदाई के बारे में उनकी क्या सोच है। एक दिन कालेज जल्दी छूट गया और मैं जल्दी घर आ पहुँची। दोपहर को घर पर कोई होगा यह मैंने सोचा नहीं था। मेरे पास चाबी थी, दरवाजा खोल कर मैं अन्दर गई, लॉबी के दरवाजे में ही मेरे कदम रुक गए, जो नजारा मेरे सामने था उसे देख कर मैं हिल ही ना पाई। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! सोफ़े पर जीजू लेटे थे, उनके पैर जमीन पर थे, पैंट नीचे सरकी हुई थी, पूरी हलफ़ नंगी आपा उनकी जांघों पर सवार थी, जीजू का लण्ड आपा की चूत में फंसा हुआ दिख रहा था, आपा अपने चूतड़ उठा-गिरा कर लण्ड चूत में अन्दर बाहर कर रही थी। जब आपा के कूल्हे ऊपर उठाते थे तब जीजू का मोटा सा लम्बा सा लण्ड साफ दिखाई दे रहा था, जब कूल्हे नीचे गिरते थे तब पूरा लण्ड आपा की चूत में घुस जाता था। आपा के चूचे जीजू के मुँह पास थे और मेरे ख्याल से जीजू उन्हें चूस भी रहे थे। मैंने ऐसा खेल कभी देखा नहीं था. मेरा दिल धक धक करने लगा, बदन पर पसीना आ गया और चूत ने पानी बहा दिया। इतने में जीजू ने मुझे देख लिया। चुदाई की रफ्तार चालू रखते हुए वो बोले- अरे नाज़नीन, कब आई? आ जा आ जा, शरमा मत ! मैं तुरंत होश में आई और भाग कर अपने कमरे में चली गई। दूसरे दीन जीजू क्लिनिक पर गए तब मैंने आपा से कहा- आपा मुझे माफ़ कर देना, मैं अनजाने में आ पहुंची थी, मुझे पता नहीं था कि जीजू और आप उस वक्त घर पर होंगे और आप दोनों…!! आपा ने मुझे आश्वस्त किया कि कुछ गलत नहीं हुआ था, वो बोली- देख नाज़नीन, सेक्स के बारे में हम बिल्कुल खुले विचारों के हैं, चोदने चुदवाने से हम कोई परहेज नहीं रखते हैं, हम दोनों बीच समझौता भी हुआ है कि तेरे जीजू किसी भी लड़की को चोद सकते हैं और मैं किसी भी मनपसंद मर्द से चुदवा सकती हूँ। लेकिन हर ऐरे ग़ैरे के साथ हम चुदाई नहीं करते, हमारा एक छोटा सा ग्रुप है जिसके मेम्बर्स आपस में ग्रुप सेक्स करते हैं। मुझे यह सुन कर बहुत हैरानी हुई, मैंने पूछा- तो तुमने जीजू के अलावा और किसी से भी..? आपा- हाँ, चुदावाया है, और तेरे जीजू ने दूसरी दो लड़कियों को चोदा भी है। मैं- आपके ग्रुप में कोई भी शामिल हो सकता है? आपा- नहीं… आने वाला मर्द या लड़की सबको मंजूर होना चाहिए, ज्यादातर हम जाने पहचाने लोगों को ही लेते हैं। मैं- मैं पूछ सकती हूँ कि कौन कौन है आपके ग्रुप में? आपा- अभी नहीं, वक्त आने पर बता दूँगी। मैं- किसने ग्रुप शुरू किया और कैसे? आपा- आदिल के एक दोस्त को लण्ड खड़ा ना होने की बीमारी थी, उसी के इलाज के लिए मैंने उससे चुदवाया, आदिल वहाँ मौजूद थे, दोस्त के बाद तुरंत आदिल ने मुझे चोदा, उनको और ज्यादा मजा आया, वो कहने लगे कि दूसरे लण्ड से चुदी हुई चूत को चोदने में और ज्यादा मजा आया। उनके दोस्त ने वचन दिया कि वो ऐसी लड़की से शादी करेगा जो आदिल से चुदवाने तैयार हो। ऐसी मिल भी गई और उनकी शादी भी हो गई. वचन के मुताबिक दोस्त की बीवी ने आदिल से चुदवाया। उस वक्त मैं और वो दोस्त भी मौजूद थे, हमने भी मस्त चुदाई कर ली। बाद में दूसरे दो कपल और शामिल हुए। मैं- एक बात पूछूं? आपा- क्या? मैं- जिसे आप लोग orgasm कहते हैं, वो क्या होता है? आपा- orgasm तो महसूस किया जाता है, दुनिया का सबसे बड़ा मज़ा तो बस orgasm में है। कई लोग उसे परम आनन्द कहते हैं तो कई लोग उसे ज़न्नत कहते हैं। orgasm के दौरान व्यकति अपने आप को भूल जाता है और बस आनन्द ही आनन्द का अनुभव होता है। मैं- हर च… चु. चुदाई के वक्त orgasm होता है? आपा- ना… ना… औरत को हर बार नहीं भी होता पर मर्द को होता है, उस वक्त लण्ड से वीर्य की पिचाकरियाँ छूटती है। लड़की को ना भी हो, एक बार हो, या एक से ज्यादा भी हो! चोदने वाला मर्द सही तकनीक जानता हो तो लड़की को एक बार की चुदाई में दो या तीन orgasm दे सकता है। मैं- इस मामले में जीजू कैसे हैं? आपा- बहुत अच्छे! मैं- आप लोग रोज रोज..? आपा- हाँ, तुम्हारे जीजू रोज मुझे चोदते हैं, कम से कम एक orgasm होने तक, कभी कभी दो orgasm भी करवाते हैं। तूने अब तक चुदावाया नहीं है क्या? मैं- नहीं! आपा- वहाँ अपनी चूत में उंगली करती हो? मैं- हाँ ! आपा- मज़ा आता है? मैं- जब जब वो छोटे दाने से touch होता है ना! आपा- वो छोटे दाने को clitoris क्लिटोरिस कहते हैं… आदमी के लण्ड मुकाबले का अंग है वो.. अच्छी तरह उसको उत्तेजित करने से orgasm होता है! अच्छा अब छोड़ ये बातें, साफ साफ बता, अपनी चूत चुदवा कर मज़ा लेना है अपने जीजू से? आपा की बात सुनते ही मैं शरमा गई जीजू का लण्ड याद आ गया, तुरंत मेरी चूत ने संकोचन किया और मेरी क्लिट ने सर उठाया, चूचियाँ भारी होने लगी, मैं कुछ बोल ना सकी। आपा मेरे पास आई, मेरे स्तन थाम कर बोली- तूने पैड वाली ब्रा तो नहीं पहनी है ना? कितने अच्छे है तेरे चूचे… तेरे जीजू कहते हैं कि ऐसे चूचे बनाने के लिये तूने काफी चुदाई करवाई होगी। मैं- आपा, मैं तो मोटी हूँ, कौन पसंद करेगा मुझे? सब लोग पतली लड़कियाँ चाहते हैं। आपा- अरे, थोड़ी सी मोटी हो तो क्या हुआ? खूबसूरत तो हो, कोई ना कोई मिल जाएगा… चुदवाने की इच्छा हो तो बोल, मैं आदिल से बात करुँगी। मैंने अपनी गर्दन झुका कर धीमी आवाज से हाँ कह दी। उस शाम खाना खाते समय मैं जीजू से नजर नहीं मिला सकी पर वो तो बेशर्म थे, बोले- क्या ख्याल है साली जी? पसंद आया मेरा लण्ड? आपा- आदिल, छोड़िये बेचारी को, बहुत शरमाती है! अब तक उसने लण्ड नहीं लिया है। जीजू- अच्छा, तब तो कंवारी है, ऐसा क्या? आपा- हाँ, ऐसा ही है। जीजू- अरे वाह नाज़नीन, तो तुम अपने जीजू को अपनी अनछुई चूत का तोहफ़ा दे रही हो? मैंने तो शर के मारे अपना सर एकदम नीचे झुका लिया। जीजू- शर्म आ रही है? तेरे जैसी खूबसूरत साली को चोदने से कौन मूर्ख रुक सकता है? तो हो जाए अभी? जीजू ने मेरी ठुड्डी को पकड़ कर मेरा चेहरा ऊपर को किया। मेरे होंठों की मुस्कान को मैं रोक ना सकी और जीजू से छिपा ना सकी। जीजू उठ कर मेरी कुर्सी के पीछे आये, मेरे कन्धों पर हाथ रख कर आगे झुके और मेरे गाल पर बोसे लेने लगे। मुझे गुदगुदी होने लगी, मैं छटपटा गई। आपा बोली- तुम दोनों बेडरूम में चले जाओ, मैं भी बस आती हूँ। जीजू मेरा हाथ पकड़ कर बेडरूम में पलंग पर ले गए, मुझे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन जीजू का लण्ड याद आते ही उनसे चुदवाने की इच्छा जोर पकड़ लेती थी। जीजू ने मुझे नाइट ड्रेस पजामा और नाइटी पहनने को दी और खुद भी पहन ली। जीजू अपने पाँव लंबे करके पलंग पर बैठे और मुझे अपनी गोद में बिठाया, मेरे पाँव भी लंबे रख दिए। मेरी पीठ उनके सीने से लगी हुई थी, उनके हाथ मेरी क़मर से लिपट कर पेट तक पहुंच गए, मेरा चेहरा घुमा कर उसने मेरे लबों पर चुम्बन किया। फ्रेंच किस का मुझे कोई अनुभव ना था, क्या करना है, वो मुझे पता ना था। मैं होंठ बंद किए बैठी रही, उन्होंने जीभ से मेरे होंठ चाटे और जीभ मुँह में डालने का प्रयास किया, मैंने मुँह खोला नहीं, उन्होंने मेरा नीचे वाला होंठ अपने होंठों बीच लेकर चूसा, मेरे बदन में झुरझुरी फ़ैल गई और मेरी दोनों निप्पल और क्लिट खड़ी होने लगी। पेट पर से उनका हाथ मेरे वक्ष पर आ गया, मैंने अपने हाथों की चौकड़ी बना कर अपनी छाती ढक रखी थी, मेरा हाथ हटा कर जीजू ने मेरे उरोज थाम लिये और नाइटी के ऊपर से सहलाने लगे, बोले- नाज़नीन, तेरे चूचे तो बहुत बड़े हैं, और सख्त भी हैं। मैं कुछ बोली नहीं, उनके हाथ पर हाथ रख दिए लेकिन हटाया नहीं। कुछ देर तक स्तन सहलाने के बाद उन्होंने मेरी नाईटी के हुक खोल दिये। मुझे शर्म आती थी इसलिये मैंने नाईटी के पल्लुओं को पकड़ कर रखा, हटाने नहीं दिया। वो फ़िर से मेरे लबों पर किस करने लगे, तो मैं भूल गई और उन्होंने मेरी नाईटी पूरी खोल दी, जैसे ही उन्होंने मेरा नंगा चूचा हथेली में लिया, उनकी उंगलियाँ छूते ही वो कड़ी हो गई और बिजली का करंट वहीं से निकल कर मेरी चूत तक दौड़ गया, मेरी चूत ने रस बहाना शुरू कर दिया। उनका एक हाथ अब फ़िर से पेट पर उतर आया और पेट पर से जांघ पर चला गया. मेरी दाहिनी जांघ उन्होंने ऊपर उठाई, जांघ के पिछले हिस्से पर उनका हाथ फिसलने लगा, घुटने से लेकर ऊपर चूत तक जीजू ने मेरी जांघ सहलाई लेकिन चूत के बीच में छुआ नहीं। लबों पर चुम्बन करते हुए उन्होंने दूसरे हाथ से मेरा पजामा सरका दिया। मैं इतनी उत्तेजित हो गई थी कि मैंने पजामा उतरने में कोई विरोध नहीं किया बल्कि कूल्हे उठा कर सहयोग दिया। अब उनका हाथ मेरी नंगी जांघ का पिछला हिस्सा सहलाने लगा, दूसरा हाथ चूत पर लग गया। उनकी उंगलियों ने मेरी क्लिट ढूंढ ली, दूसरे हाथ ने चूत का मुँह खोज लिया, एक साथ क्लिट सहलाई और चूत में दो उंगलियाँ भी डाली। जीजू की उत्तेजना भी कुछ कम नहीं थी, उनका बड़ा लण्ड कब का मेरे चूतरों की दरार में सैट गया था, लण्ड कामरस बहा रहा था, इससे मेरे नितम्ब गीले हो चुके थे। एक ओर मेरी चूत ने फटके मारने शुरू किए तो दूसरी ओर लण्ड ठुमका लेने लगा। जीजू ने चुम्बन तोड़ा, मुझे थोड़ा अलग किया और अपना पाजामा उतार दिया। झटपट उन्होंने कॉन्डोम पहन लिया। एक हाथ से लण्ड सीधा पकड़ रख के उन्होंने मेरे कूल्हे ऐसे रख दिये की लण्ड का मत्था मेरी चूत में घुस गया। मैंने हौले से चूतड़ नीचे किए, आसानी से जीजू का पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस गया। मुझे हल्का सा ही दर्द हुआ और मैं पीछे की ओर ढल कर उनके सीने पर लेट गई, अपने कूल्हे हिला कर हल्के धक्के से वो मुझे चोदने लगे, साथ साथ उनकी उंगली मेरा दाना सहलाती रही। इस पोजिशन में थोड़ा सा ही लण्ड चूत में आ जा सकता था इसलिये उन्होंने मुझे धकेल कर आगे झुका दिया और चारों पैर पर कर दिया, वो पीछे से ऊपर चढ़ गए, अब जीजू को क़मर हिलाने की जगह मिल गई, लंबे धक्कों से वो मुझे चोदने लगे, पूरा लण्ड बाहर खींच कर वो एक झटके से चूत में घुसेड़ने लगे, मेरी योनि की दीवारें लण्ड से चिपक गई थी। थोड़ी ही देर में धक्के की रफ्तार बढ़ने लगी, आगे झुक कर उन्होंने मेरे स्तन थाम लिये और चोदते चले गये। मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैंने मेरा सिर पलंग पर रख दिया था। इतने में जीजू जोर से मुझ से लिपट गए, लण्ड चूत की गहराई में घुसेड़ दिया और पांच सात पिचकारियाँ मार कर झड़ गए। उनके लण्ड ने ठुमक ठुमक ठुनके लगाये और मेरी चूत में कुछ फटके हुए, बहुत मजा आया। लण्ड निकाल कर जीजू मेरे ऊपर से उतर गए। इतने में आपा आ गई, उन्होंने पूछा- आया ना मजा? मैंने सर झुका दिया। जीजू बोले- छोटा orgasm हुआ नाज़नीन को… तुम कुछ करना चाहती हो? आपा- ना, अभी नहीं… मेरी राय है कि इसे लण्ड से ही पक्का orgasm करवाना चाहिए। जीजू- तो कल हम सचिन के घर जा रहे हैं, नाज़नीन को भी ले जायेंगे, ग्रुप में अच्छा रहेगा. क्या कहती हो नाज़नीन? चलोगी ना? आपा- वहाँ दूसरे दोस्त भी आएंगे और ग्रुप चुदाई करेंगे, मजा आएगा… नाज़नीन है ना? मैं- मैंने कभी ऐसा किया नहीं है। मैंने मना कर दिया और जब तक मैं अमदाबाद में रही, आप और जीजू के साथ उनके बेडरूम में ही सोती थी!
चूहे ने दो चूतें चुदवाईं -2 (Chuhe Ne Do Chuten Chudwai-2)

चूहे ने दो चूतें चुदवाईं -2 (Chuhe Ne Do Chuten Chudwai-2)

अब तक आपने पढ़ा.. आंटी नंगी खड़ी ये सब देख रही थी.. मैंने अपने हाथों से उसकी टी-शर्ट ऊपर कर उसकी स्कर्ट का बटन खोल दिया और स्कर्ट जमीन पर आ गई। अब उसकी मोटी गाण्ड पर चिपकी काली पैन्टी नजर आ रही थी.. अभी मैं कुछ करूँ.. उससे पहले अपनी टी-शर्ट भी उतार दी.. अब उसके भरे-भरे खरबूजे जैसे मम्मे काली ब्रा में उछल रहे थे। मैं आगे बढ़ा.. उसकी काली पैन्टी को पकड़ कर नीचे खींचने लगा.. तो पता चला उसकी पैन्टी चिकनी और गीली हो चुकी है। मैंने उसे कुर्सी पर बिठाया और उसकी एक टांग हाथ से पकड़ कर ऊपर की। उसकी भरी-पूरी चूत देखकर मेरे तो होश उड़ गए, उसकी गुलाबी चूत काले-काले बालों के बीच से रस टपका रही थी। मैंने उसे छूने के लिए हाथ बढ़ाया.. तभी आंटी बोली- सालों.. मैं कब से चूत खोले खड़ी हूँ.. और तुम अपने में लग गए.. मुझे कौन देखेगा? अब आगे.. खुशबू बोली- इनकी बात सही है.. हम उनको कब से अनदेखा कर रहे हैं। मुझे भी डर था कि कहीं ये राज़ सबके सामने न खोल दे.. इसलिए हमने उसको सोफे पर लिटाया। उसकी एक टांग नीचे जमीन पर रखी और दूसरी टांग सोफे के ऊपर वाले हिस्से पर रखी.. और जिस तौलिये से उसने अपनी प्यारी सी रसीली चूत छुपा रखी थी, तो वो ले लिया। अब वह हम दोनों के सामने एकदम नंगी लेटी हुई थी और हसरत भरी निगाहों से मुझे देख रही थी। खुशबू उसके सर के पास थी और मैं उसकी जाँघों के पास बैठा था। खुशबू ने भी सिर्फ काली ब्रा पहन रखी थी और उसकी भी चूत में से रस टपक रहा था। मैंने अभी तक किसी को चोदने की बात तो छोड़ो.. कभी किसी औरत को नंगी भी नहीं देखा था.. यह मेरा पहला अनुभव था। िकिसको संभालूँ.. मेरी तो समझ में ही नहीं आ रहा था। फिर आंटी ने खुशबू की गाण्ड पर हाथ रख कर उसे अपने पास खींचा। मैंने भी आंटी की चूत पर हाथ रखा और उसे मसलना शुरू कर दिया। अब मैं आंटी के मुँह पर अपना मुँह ले गया और अपने जीवन की पहली किस आंटी को दी.. आंटी ने भी अपनी चिकनी और मीठी जीभ से उसका स्वागत किया। मैं उसकी जीभ चूसता रहा साथ ही उसकी रसीली चूत को अपने हाथ से सहलाता रहा। दूसरी और आंटी एक हाथ से खुशबू की चूत में उंगली घुमाती रही। वैसे मैं इस काम में नया था इसलिए ज्यादा सब्र नहीं कर पाया और आंटी की दो टाँगों के बीच आ गया। मेरा लंड तो कब से तैयार खड़ा था.. जैसे ही मैंने चूत पर अपना लंड रगड़ा.. आंटी एकदम चिल्ला उठी। खुशबू ने मुझे रोका और उसने अलमारी से एक पैकेट निकाला.. उसमें से उसने दो कन्डोम निकाल कर बाहर रखे। एक कन्डोम के पैकेट को तोड़ कर उसमें से कन्डोम निकाल कर मेरे लंड पर पहनाया.. फिर उसने मेरे लंड को चुम्मी दी और बोला- शुरू हो जा मेरे राजा.. अभी तो ये पहली ही लड़ाई है.. दूसरा मैदान तेरा इंतज़ार कर रहा है। उसने ऐसा बोल कर अपनी चूत की ओर इशारा किया। आंटी की चूत कब से पानी टपका रही थी.. मेरे लंड रखते ही आंटी ने जोर का झटका दिया और मेरा पूरा लंड एक झटके में ही अन्दर ले लिया। इधर खुशबू आंटी के मम्मों का रस पी रही थी और मैं आंटी की चूत के रस को निकाल रहा था। लगभग 40-50 झटके मारने के बाद आंटी की चूत में मैंने अपना रस खाली कर दिया.. और मैं आंटी पर ही ढेर हो गया.. धीरे-धीरे मेरा लंड छोटा होकर बाहर आ गया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! मुझे खुशबू ने खड़ा किया और बोला- बच्चू.. अपनी सपनों की रानी की तो चूत मार ली.. लेकिन मेरी चूत को कौन चोदेगा? चल खड़ा हो। उसने मुझे ऑर्डर दिया तो मैं खड़ा तो हो गया.. लेकिन मेरा लंड अभी खड़ा नहीं हुआ था। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने बोला- तू उसकी फ़िकर मत कर.. मैं उसे खड़ा भी करूँगी और बड़ा भी कर दूँगी। ऐसा बोल कर उसने कन्डोम निकाल लिया और मेरे मुरझाए हुए लंड को चूसने लगी। आंटी सोफे पर बैठी और मेरे मुँह से मुँह मिलाकर अपनी वासना का इकरार करने लगी। मैं दोनों तरफ से मजे लेने लगा और कुछ ही देर में मेरा लंड भी मज़े के लिए उठ खड़ा हुआ। खुशबू अब बेसब्र हो चुकी थी.. उसकी चूत कब से प्यासी थी, उसने झट से दूसरा कन्डोम निकाला और मेरे लंड को पहना दिया और अपनी दोनों टाँगें खोल सोफे पर बैठ गई। उसने अपनी टाँगें ऊपर कर लीं ताकि मैं उसकी चूत के दीदार कर सकूँ। आंटी की चूत से इसकी चूत काफी अलग थी.. उसके ऊपर बहुत कम बाल थे और इतनी फूली हुई चूत थी कि मानो दो टाँगों के बीच जैसे ‘वड़ापाव’ रखा हो। आंटी ने उसके मम्मों को दबाने शुरू कर दिए और उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी। मैंने जैसे आंटी के साथ किया था.. वैसे ही इसकी चूत पर अपना लंड रखा.. लेकिन लंड का सुपारा भी अन्दर नहीं जा रहा था। मैंने इस बार आंटी की तरफ देखा.. उन्होंने बोला- यश जी.. ये चूत सिर्फ 20 साल की है और गाजर.. मूली.. ककड़ी के अलावा इसके अन्दर कुछ भी नहीं गया है.. इसमें तो आपको मेहनत करनी पड़ेगी। उस पर खुशबू बोली- हाँ मेरी जान.. जरा संभाल कर चोदना.. एकदम पेटीपैक फुद्दी है.. आंटी की फुद्दी की तरह नहीं है कि जो 9 इंच का लंड को भी एक ही निवाले में निगल जाए। यह सुनकर मैं समझ गया कि खुशबू की चूत ने अभी तक लंड नहीं नापा है। मैंने उसकी चूत में दो उंगलियाँ डालीं.. वो कराहने लगी। उसकी चूत में से निकलते रस को मैंने अपने कन्डोम चढ़े लंड पर लगाया और फिर चूत के ऊपर लौड़ा रख कर धीरे से धक्का दिया। मेरा सुपारा चूत की फांकों से अन्दर पहुँच गया और बाकी के लंड के लिए जगह बनाने लगा। इधर लौड़े के सुपारे ने चूत में हाजिरी लगाईं ही थी कि खुशबू जल-बिन-मछली की तरह तड़पने लगी थी। उसको काबू में रखने आंटी लगातार उसे चूम रही थी और उसके मम्मों को दबा रही थी। आहिस्ता-आहिस्ता मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और फिर मैं उसे झटके देने लगा। अब खुशबू भी धीरे-धीरे सामान्य हो कर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी। मेरा लंड थोड़ी देर पहले ही झड़ा था.. तो अबकी लम्बी पारी खेलने को तैयार था। उस तरफ खुशबू की 19 साल प्यासी चूत.. पानी पर पानी छोड़ रही थी। करीब 15 मिनट के बाद में भी झड़ गया और चूत में ही घुसे लंड के साथ खुशबू के ऊपर ढेर हो गया। खुशबू मुझे चाटने लगी और ख़ुशी के मारे चुम्मियाँ बरसाने लगी। फिर हम तीनों ने कपड़े पहने और आशिकाना बातचीत शुरू हो गई। उसके बाद हमने कई बार साथ में चुदाई की और अलग-अलग भी चूत चुदाई हुई। आज भी मैं कहीं गदराया बदन पाता या उसके बारे में सुनता हूँ.. तो मुझे खुशबू की याद आ जाती है। आंटी की अब शादी हो चुकी है.. लेकिन वो जब भी मिलती है.. अपनी चूत मरवाए बिना नहीं जाती। खुशबू की शादी कनाडा में हुई है और वो चैट और ईमेल के जरिए मेरे संपर्क में है। मैंने भी उसके बाद करीबन 20-22 चूतों को चखा है और आज भी मुझे थोड़ी मोटी लड़कियाँ या औरतें ज्यादा पसंद हैं। अभी मैंने शादी नहीं की है.. किसी मस्त चूत की तलाश में हूँ। यह थी मेरी पहली चुदाई.. जो एक चूहे की वजह से संभव हुई.. इसलिए मैं उस चूहे का खरे दिल से और खड़े लंड से आभारी हूँ। अपने प्रतिभाव जरुर भेजिएगा.. और कृपया अन्तर्वासना के सम्पर्क में बने रहें।
चूहे ने दो चूतें चुदवाईं -1 (Chuhe Ne Do Chuten Chudwai-1)

चूहे ने दो चूतें चुदवाईं -1 (Chuhe Ne Do Chuten Chudwai-1)

दोस्तो.. मेरा नाम यश है.. मैं गुजरात से हूँ। अभी मेरी उम्र 29 साल है और मैं एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाता हूँ। यह मेरी पहली कहानी है.. जो मैं आप लोगों की खिदमत में पेश कर रहा हूँ। बात उन दिनों की है.. जब मैं अपनी 12 वीं की परीक्षा के बाद की छुट्टियाँ मना रहा था। मेरे घर के पड़ोस में एक छोटा सा परिवार रहता था.. पति-पत्नी और उनके दो बच्चे.. पति-पत्नी दोनों नौकरी करते थे.. बड़ा लड़का कहीं हॉस्टल में रह कर पढ़ता था और उनकी एक बेटी थी.. जो कॉलेज के तीसरे साल में थी.. उसका नाम खुशबू था। खुशबू और मेरी बहुत अच्छी दोस्ती थी.. मैं हमेशा समय बिताने के लिए खुशबू के पास चला जाता था। हम दोनों कैरम खेलते.. या टीवी देखते रहते थे। वैसे खुशबू अपनी उम्र के हिसाब से काफी बड़ी दिखती थी और थोड़ी मोटी या यूँ कहें गदराई हुई सी थी। शायद इसीलिए उसको कभी कोई और लड़के के साथ नहीं देखा था। उसके मम्मे बड़े-बड़े खरबूजे जैसे थे और चूतड़ भी काफी बड़े थे। वह घर में अपने भाई की टी-शर्ट और स्कर्ट पहन कर रहती थी। हर दोपहर जब उसके मम्मी-पापा घर नहीं होते.. तब हम दोनों उसके घर पर साथ होते.. लेकिन मुझे खुशबू में इतना इंटरेस्ट नहीं था। एक दिन उसके पापा ने सुबह दस बजे के आस-पास मुझे आवाज लगाई और उन्होंने बताया कि वो और उनकी बीवी कोई मीटिंग के सिलसिले में जा रहे थे, उनको शायद आने में देर भी हो सकती थी, उन्होंने मुझे खुशबू को कम्पनी देने को कहा और निकल गए। एक-डेढ़ घंटे के बाद मानसी आंटी ने मुझे आवाज लगाई। मानसी आंटी खुशबू के पापा की मुँह-बोली बहन है.. जो अकेली होने के कारण इन लोगों के साथ ही रहती थी। मानसी के रूप में इन लोगों को फ्री की नौकरानी मिल गई थी.. जो घर का पूरा काम बिना पगार माँगे करती थी। उसकी उम्र उस वक्त करीबन 29 साल थी और वह देखने में एकदम पटाखा माल थी.. उसके बड़े-बड़े मम्मे.. गोल भरी हुई गाण्ड और पतली कमर और गोरा चेहरा.. उसकी भूरी आँखों पर पूरा मोहल्ला मरता था। मैं भी कई बार उसे याद करके मुठ्ठ मार चुका था। बस.. मैं इसी आवाज़ का इंतजार कर रहा था। मैं घर में कह कर खुशबू के घर पहुँच गया। उसके घर में दो कमरे और रसोई घर था.. बीच वाले कमरे में टीवी था.. इसलिए हम सब उसी कमरे में बैठते थे। मैं वहाँ पहुँच गया। आज भी खुशबू ने टी-शर्ट और स्कर्ट पहन रखा था.. उसकी टी-शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिससे उसका क्लीवेज खुल कर दिख रहा था। वह कुर्सी पर बैठी हुई टीवी के चैनल बदल रही थी, उसने मुझे देख कर स्माइल किया और ऊपर से नीचे तक मुझे देखा। मैंने भी टी-शर्ट पहनी थी और हाफ-पैन्ट पहना हुआ था। छुट्टी होने की वजह से मैंने अन्दर कुछ नहीं पहना था, मैं आज भी छुट्टी के दिन अंडरवियर या बनियान नहीं पहनता हूँ। मैं भी उसके बाजू वाली कुर्सी में बैठ गया। ‘आंटी.. पोंछा मार ले.. फिर हम कैरम खेलते हैं।’ खुशबू ने चैनल बदलते हुए कहा। ‘ओके.. मैं टीवी देखता रहा। थोड़ी देर में मानसी आंटी पोंछा मारती हुई उस कमरे में आई.. उसने ब्लाउज और घाघरा पहन रखा था। उसके लो-कट ब्लाउज से उसके मम्मे बाहर झाँक रहे थे.. मैं वासना से उसे देखने लगा। कमरे के बीच में पोंछा लगा कर वो खड़ी हुई.. तो उसकी गाण्ड मेरे और खुशबू की तरफ थी। उसकी उभरी हुई गाण्ड के बीच उसका घाघरा फंस गया था.. खुशबू ने उसके घाघरे को पकड़ कर चूतड़ों की दरार में से खींचा और मेरी तरफ देख कर हँसी। आंटी शरमा कर अन्दर भाग गई। खुशबू ने कैरम निकाला और हम खेलने लगे.. टीवी पर स्टार मूवी चल रहा था… जिसमें कोई अंग्रेजी रोमाँटिक फिल्म चल रही थी.. जिसमें हीरो-हीरोइन थोड़ी-थोड़ी देर में चुम्मा-चाटी करते थे। दूसरी ओर खुशबू ने टी-शर्ट के बटन बंद नहीं किए थे.. उसमें से उसके बड़े-बड़े मम्मे झाँक रहे थे.. मेरी नजर टीवी पर और खुशबू के दूध पर जड़ी हुई थी.. जो कि उसको भी समझ में आ चुका था। मैं इसी वजह से गेम में लगातार हार रहा था.. वैसे जीतना भी किसको था? हम दोनों खेल रहे थे कि अन्दर से आंटी के चिल्लाने की आवाज़ आई। दोनों भागकर अन्दर गए और अन्दर का नज़ारा देख मेरे पैर वहीं रुक गए। आंटी ने अपनी चोली निकाल दी थी और उसके दोनों मम्मे मेरे सामने झूलते हुए दिख रहे थे.. उसने अपने घाघरे का नाड़ा भी छोड़ रखा था.. लेकिन वो नाड़े को हाथ में संभाले खड़ी थी। खुशबू ने पूछा- क्या हुआ? ‘चूहा..’ उसने एक कोने में उंगली करके बोला। ‘अरे आंटी.. वो तुझे खा थोड़ी न जाएगा.. खामखाह चिल्लाती है.. देख.. बेचारा यश तेरे मम्मे देख कर कितना डर गया.. बेचारे का मुँह भी बंद नहीं हो रहा है..’ खुशबू यह कह कर अश्लीलता से हँसने लगी। मैंने अपने आप को संभाला और आंटी ने भी अपने हाथों से अपने मम्मे छुपा लिए। ‘वैसे तू कर क्या रही थी?’ खुशबू ने उससे पूछा। ‘मेरे कपड़े भीग गए थे.. तो मैं बदल रही थी..’ इतना सुन कर हम दोनों वापस टीवी वाले कमरे में आ गए.. लेकिन अभी बैठे भी नहीं थे.. फिर से आंटी चिल्लाई, इस बार खुशबू सीधी आंटी के पास चली गई और एक हाथ से उसके कपड़े उठाए और दूसरे हाथ से उसे पकड़ कर बीच वाले कमरे में ले आई। आंटी को भी मजबूरन बीच वाले कमरे में आना पड़ा। दोनों हाथों से अपने मम्मे छुपाने की नाकाम कोशिश करती.. वो मेरे बाजू में से निकली। मैं फिर से कैरम के आगे बैठ गया। अब वो मेरे सामने ही खड़ी थी.. खुशबू ने उसके हाथ में तौलिया देते हुए कहा- अब मत चिल्लाना.. बदन पोंछ लो और कपड़े पहन लो। आंटी मेरे सामने देखते हुए बोली- इसके सामने सब करूँ? ‘वैसे भी उसने तुम्हें देख ही लिया है.. तो फिर उसके सामने करने में क्या हर्ज है?’ यह कह कर खुशबू बैठ गई। अब तो मैं आंटी को ही देख रहा था.. मैंने कैरम की तरफ तो देखा भी नहीं था। खुशबू भी मेरे बाजू में बैठी और बोली- क्या कर रहे हो जनाब.. कभी कोई औरत नहीं देखी क्या? खुशबू के इस मजाक भरे रवैये से मेरी हिम्मत खुली और मैंने बोला- औरतें तो बहुत देखी हैं.. लेकिन ऐसी नहीं देखी और वो भी बिना कपड़ों के.. इस बीच आंटी ने अपना घाघरा भी निकाल दिया था और वो अपनी दोनों जाँघों के बीच तौलिया रगड़ रही थी। मैंने खुशबू की तरफ देखा और पूछा- देखो.. ये क्या कर रही है? उसने बेशर्मी से बोला- अपनी खुजली मिटा रही है.. मैं बोला- कैसी खुजली? वो बोली- जवानी में सबको दो टाँगों के बीच में खुजली होती है.. देखो उसी खुजली के मारे तेरा लंड भी पैन्ट में तंबू बनाये खड़ा है। मैं एकदम से शरमा कर अपना लंड छुपाने लगा। खुशबू बोली- छुपाते कहाँ हो? मैं तो कब से तेरे तने हुए लंड को देख रही हूँ.. अब पैन्ट निकाल और मुझे पूरा दिखा..? मैंने कहा- क्या देखना है तुझे..? चल दिखा देता हूँ.. पर मेरी भी एक शर्त रहेगी। ‘क्या?’ ‘तुम्हें भी अपनी स्कर्ट निकालनी पड़ेगी और अपनी फुद्दी दिखानी पड़ेगी..’ वो मान गई.. मैंने अपना पैन्ट निकाला.. मेरा तना हुआ लंड उसको सलामी भर रहा था.. वो मादक और कामुक निगाहों से मेरे खड़े लौड़े को देखने लगी। मैंने उससे स्कर्ट उतारने को कहा.. उस पर वह बोली- खुद ही उतार ले.. आंटी नंगी खड़ी ये सब देख रही थी.. मैंने अपने हाथों से उसकी टी-शर्ट ऊपर कर उसकी स्कर्ट का बटन खोल दिया और स्कर्ट जमीन पर आ गई। अब उसकी मोटी गाण्ड पर चिपकी काली पैन्टी नजर आ रही थी.. अभी मैं कुछ करूँ.. उससे पहले अपनी टी-शर्ट भी उतार दी.. अब उसके भरे-भरे खरबूजे जैसे मम्मे काली ब्रा में उछल रहे थे। मैं आगे बढ़ा.. उसकी काली पैन्टी को पकड़ कर नीचे खींचने लगा.. तो पता चला उसकी पैन्टी चिकनी और गीली हो चुकी है। मैंने उसे कुर्सी पर बिठाया और उसकी एक टांग हाथ से पकड़ कर ऊपर की। उसकी भरी-पूरी चूत देखकर मेरे तो होश उड़ गए, उसकी गुलाबी चूत काले-काले बालों के बीच से रस टपका रही थी। मैंने उसे छूने के लिए हाथ बढ़ाया.. तभी आंटी बोली- सालों.. मैं कब से चूत खोले खड़ी हूँ.. और तुम अपने में लग गए.. मुझे कौन देखेगा? चूहे की बदौलत आज मुझ कुंवारे लौड़े को दो-दो तरसती चूतों का इनाम मिलने वाला था। क्या हुआ क्या दोनों चूतों को मैं किस तरह चोद पाया। यह सब पढ़ने के लिए अगले भाग का इन्तजार करना होगा। मुझे भी आप सभी के ईमेल का इन्तजार रहेगा। कहानी जारी है।
बेटी की सास मुझसे चुदने आई (Beti Ki Saas mujhse Chudane Aai)

बेटी की सास मुझसे चुदने आई (Beti Ki Saas mujhse Chudane Aai)

 दोस्तो, वैसे तो मेरी कहानी के शीर्षक ने ही आपको बता दिया है कि कहानी किस विषय से संबन्धित है पर यह एक सच्ची बात है जो पिछले महीने ही मेरे साथ घटित हुई है। मैं आपके मनोरंजन के लिए इसमें थोड़े मसाले डाल के पेश करूंगा, तो अपनी अपनी चड्डी में हाथ डालो और कहानी पढ़ कर मज़े लो। मेरा नाम विनय कपूर है और दिल्ली में रहता हूँ। उम्र 52 साल, पत्नी 49 साल, बेटी 24 साल की है, अभी 6 महीने पहले ही उसकी शादी हुई है। बेटी की शादी में ही मुझे मेरी समधन बहुत भा गई। करीब 45 साल की, गोरी चिट्टी, और खूब भरवां बदन। सच कहता हूँ उसको देख के दिल में ख्याल आया कि अगर इसको चोदने को मिल जाए तो ज़िंदगी का मज़ा आ जाए। मैंने यह भी नोटिस किया कि वो भी बड़े ध्यान से मुझे देखती, मेरी हर बात में इंटरेस्ट दिखाती। उसका नाम सुमन चोपड़ा है, एक हाई स्कूल में वाइस प्रिन्सिपल है। पढ़ी लिखी, और खुद को बहुत अच्छी तरह से संभाल के रखा है उसने। खैर मैं तो बेटी वाला था सो अपने दिल को काबू में ही करके रखा। शादी ठीक ठाक हो गई, मगर उसके बाद जब भी हमारी मुलाक़ात होती वो हर बार मेरे साथ कुछ ज़्यादा ही फ्री होने की कोशिश करती। और ऐसे ही हम धीरे धीरे एक दूसरे के काफी करीब आते चले गए, मन ही मन मैं उसे चाहने लगा था मगर हमारा रिश्ता ही ऐसा था कि हम छुप कर भी ऐसा कोई संबंध नहीं बना सकते थे क्योंकि अगर इस बात की किसी को भनक भी लग जाती तो इसका सीधा असर मेरी बेटी के वैवाहिक जीवन पर पड़ता। पिछले महीने वो हमारे घर आई, वो अकेली ही आई थी। संयोग से उस दिन मेरी बीवी भी किसी काम से अपने मायके गई थी। तो हम घर में बिल्कुल अकेले थे। उसके आने से मैं अचंभित तो हुआ, पर खुश ज़्यादा हुआ। मैंने उसे अंदर बिठाया, मरून साड़ी में वो बहुत जंच रही थी, सोफ़े पर बैठी तो ऐसी बेतकल्लुफ़ी से जैसे अधलेटी सी हो और ऐसे बैठने से उसकी साड़ी का आँचल नीचे गिर गया और उसके विशाल गोरे स्तन जैसे उसका ब्लाउज़ फाड़ के बाहर आने को बेताब थे, करीब दो ढाई इंच का उसका क्लीवेज भी दिख रहा था। दो ग्लासों में मैं शीतल पेय लाया और एक ग्लास उसे पकड़ा कर उसके सामने बैठ गया और हम इधर उधर की बातें करने लगे मगर मेरा ध्यान बार बार उसके उन्नत वक्षस्थल पर जा रहा था और वो भी अच्छी तरह जानती थी कि मेरा ध्यान कहाँ था और वो जैसे इस बात का मज़ा ले रही थी कि मैं उसके हुस्न की मन ही मन प्रसंशा कर रहा हूँ। बातें करते करते वो बोली- क्या आपके घर आने वालों को सिर्फ कोल्ड ड्रिंक्स ही मिलती है? मैंने कहा- आप हुक्म करें, क्या लेना पसंद करेंगी, घर में सब कुछ है। ‘अच्छा, क्या घर में वोड्का या कोई और ड्रिंक है?’ उसने पूछा। मैंने कहा- बिल्कुल है। कहकर मैं उठा और बार से वोड्का की बोतल, दो गिलास और खाने का समान ले आया। पहला पेग तो उसने ऐसे पिया जैसे बहुत प्यासी हो, फ़िर 2-3 पेग पीकर बोली- आप इतनी दूर क्यों बैठे हैं, इधर आइए, मेरे पास! मैं थोड़ा सकपकाया, और बोला- जी मैं ठीक हूँ। मैंने थोड़ा डरते हुये कहा। ‘पर मैं ठीक नहीं हूँ…’ यह कह कर वो सीधी हो कर बैठी जैसे अपने साइड में मुझे बैठाने की जगह बना रही हो, हिलने से उसका रुमाल नीचे गिर गया जिसे उठाने के लिए वो आगे को झुकी, पर उसकी आँखें सिर्फ मेरे चेहरे पे गड़ी थी। जब वो झुकी तो उसके वक्षस्थल का एक बहुत ही खुला प्रदर्शन मेरी आँखों के सामने हुआ, जिसे मैंने अपनी आँखों से अपने मन में समा लिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! ‘क्या देख रहे हो कपूर साहब?’ उसने कहा तो मैंने अपनी आंखें उसके वक्ष से हटा ली और बोला- जी कुछ नहीं… तो वो बोली- आप शर्माते बहुत हो, अगर कुछ देखना है तो आराम से मेरे पास आकर बैठ कर देख लो, मुझे बुरा नहीं लगेगा। उसके इस ब्यान से मेरे तो अंदर उथल पुथल सी मच गई, मैं सोचने लगा कि आज यह क्या करने आई है, क्या मुझसे चुदने आई है। मेरी तरफ से कोई खास रेस्पोन्स न देख कर वो उठी, और बिल्कुल मेरी बगल में आकर बैठ गई- देखो कपूर साहब, सच कहती हूँ, जिस दिन से आपको देखा है, न जाने क्यों, मैं आप पे मरी पड़ी हूँ, आज मौका है, मैं अपने दिल की करना चाहती हूँ, मैं जानती हूँ कि आप भी मुझे पसंद करते है, क्या आप मेरा साथ दोगे? मेरे तो जैसे हलक में ज़ुबान ही नहीं हो, बड़ी मुश्किल से मैंने कहा- जी मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ, हम तो लड़की वाले हैं। वो तपाक से बोली- अरे माँ की चूत लड़की वालों की… यहाँ मैं क्या बात कर रही हूँ और आप क्या कह रहे हो? मुझे बड़ी हैरानी हुई उसके मुख से गाली सुन कर! वो बोली- देखो अगर दिल है तो बोलो नहीं तो रहने दो, मैं चली जाती हूँ। अब दिल तो मेरा भी कर रहा था, मैंने कहा- देखिये आप जाइए मत, मगर मेरे लिए ये सब बड़ा अजीब है। ‘अरे मुझे औरत हो अजीब नहीं लग रहा, और आप मर्द हो कर शर्मा रहे हो, सच बताओ अगर मैं आपको खुल्ली ऑफर दूँ तो आप क्या करोगे, मान जाओगे या इंकार कर दोगे?’ ‘देखो सुमन, तुम जैसी हसीन औरत को कोई बेवकूफ ही ठुकराएगा, मगर मुझे अपनी बच्ची की चिंता है, नहीं तो मैं तो कब से तुम्हें दिल ही दिल में चाहता हूँ।’ मैंने कहा। ‘तो क्यों न आज दो चाहने वालों के मन की मुराद पूरी हो जाए…’ यह कह कर उसने अपने ब्लाउज़ के बटन खोलने शुरू कर दिये और ब्लाउज़ उतार कर फेंक दिया, फिर खड़ी होकर साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिया, अब वो मेरे सामने सिर्फ पिंक ब्रा पेंटी में खड़ी थी। अब तो मेरे लिए और भी मुश्किल हो रहा था, मैं खड़ा हुआ, और उठ कर उसे बाहों में भर लिया। बाहों में आते ही उसने मेरा सर नीचे को खींचा और अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिये। फिर तो मैं उस पर टूट पड़ा और मैंने भी बिना किसी हिचकिचाहट के उसके होंठ चूसने शुरू कर दिये तो उसने भी मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ के सहलाना शुरू कर दिया। जब लंड थोड़ा सा तन गया तो वो बोली- विनय, अपना लंड बाहर निकालो मुझे चूसना है। मैंने कहा- सुमन तुम तो बहुत ही खुल्ला बोलती हो, अगर बोलने में इतनी तेज़ हो तो थोड़ी तेज़ी अपने एक्शन में भी दिखाओ और खुद ही निकाल के चूस लो। वो झट से नीचे बैठी, मेरी बेल्ट खोली, पैंट खोल के चड्डी के साथ ही नीचे उतार दी और मेरे लंड को हाथ में पकड़ के बोली- विनय, तुम पर उम्र ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया, नहीं तो आज तक जिस किसी के सामने भी मैंने अपने कपड़े उतारे हैं, उसका हमेशा तना हुआ लंड ही पैंट से बाहर निकला है। मुझ थोड़ा ग्लानि महसूस हुई, मगर फिर भी मैंने संभाल कर कहा- अरे, यह तो रूठा पड़ा है, कहता है आंटी अपने प्यारे प्यारे होंठों में लेकर चूसे, मुझे प्यार करे तभी खड़ा होऊँगा। वो हंसी और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी, मैंने अपने बाकी के कपड़े भी उतार दिये, पूरी तरह से नंगा हो कर मैं सोफ़े पे बैठ गया और वो मेरे पावों में नीचे फर्श पर बैठ कर मेरा लंड चूसने लगी। मैंने उसका ब्रा पेंटी भी उतरवा दी, साली के बदन पे कहीं भी एक बाल तक नहीं था। सारे बदन को बड़ी अच्छी तरह से वेक्स करवाया हुआ था। एकदम गोरा, चिकना बदन, जैसे किसी स्वीट सिक्स्टीन की लड़की का हो। उसके चूसने से मेरा लंड भी तन कर लोहा हो गया। जब वो मेरा लंड चूस चुकी तो मैंने उस से पूछा- सुमन क्या तुम मुझसे अपनी चूत चटवाना पसंद करोगी? ‘मुझे चूत चटवाना बहुत पसंद है विनय, मगर अब मैं चुदवाने के मूड में हूँ, पहले मुझे अच्छे से चोद दो, चटवाने का दूसरे ट्रिप में देखेंगे।’ वो मुस्कुरा कर बोली। ‘मतलब तुम मुझसे दो बार चुदोगी?’ मैंने थोड़ा हैरानी ज़ाहिर करते हुये पूछा। ‘क्यों, एक औरत को दो बार चोदने का दम नहीं है क्या?’ वो तपाक से बोली। अब तो बात मर्दानगी पर आ गई थी, मैंने कहा- नहीं, दम तो बहुत है, जितनी बार कहोगी उतनी बार चोद दूँगा तुझे, मगर यह बता कि यह चुदने चोदने का प्रोग्राम कैसे बनाया तुमने? वो बोली- पहले लंड तो डाल… क्या सारी बातें पहले ही करनी हैं? मैंने अपना लंड उसकी चूत पे रखा और अंदर डाल दिया और धीरे धीरे उसे चोदने लगा, उसने अपनी बाहों और टाँगों दोनों के घेरे में मुझे जकड़ लिया। ‘जानते हो विनय, मेरी बचपन से आदत रही है, जिस चीज़ को मैं पसंद करती हूँ, उसको हर हाल में हासिल कर लेती हूँ।’ मैंने पूछा- अच्छा, तो यह बताओ मुझ पर दिल कब और कैसे आया? ‘जिस दिन हम रिश्ता लेकर आपके घर आए थे, मैंने तुम्हें देख कर तभी सोच लिया था, रिश्ता हो या न हो मगर मैं तुम्हारा लंड ज़रूर लूँगी।’ उसने मेरे होंठों को चूम कर कहा। मुझे उसकी बात सुन कर हंसी आ गई, उसने पूछा- हँसे क्यों? मैंने कहा- वैसे ही एक विचार मन में आ गया। वो बोली- बताओ न क्या? ‘बुरा तो नहीं मानोगी?’ मैंने पूछा। ‘बिल्कुल नहीं, बताओ?’ उसने कहा। ‘मेरे मन में वैसे ही खयाल आया कि अगर तुम्हारे बेटे ने मेरी बेटी को चोदा तो मैंने भी उसकी माँ चोद दी।’ मैंने उससे कहा। सुन कर वो बड़ी खिलखिला कर हंसी- यह बात तुमने मेरे मतलब की की, जानते हो मुझे मर्दों की तरह गालियाँ निकालने में, मर्दों की तरह खुल्ला बोलने और मर्दों के साथ ही खुल्लम खुल्ला बोलने में बड़ा मज़ा आता है। फिर तो मैंने भी कह दिया- तो यहाँ कौन सा तेरी गाँड में लाउडा घुसा है, जो माँ चुदवानी है यहाँ चुदवा ले। मेरी बात सुन कर वो बहुत खुश हुई- ले पहले मेरी जीभ चूस कुत्ते, फिर तुझे बताऊँगी कि मुझे कैसा चुदवाना अच्छा लगता है। मैंने उसकी जीभ अपने मुख में लेकर चूसी और उसके होंठों पे लगी सारी लिपस्टिक भी चाट गया। नीचे से चुदाई भी चल रही थी, मगर मैंने स्पीड बढ़ा दी, वो भी मेरा पूरा साथ नीचे से अपनी कमर उचका उचका कर दे रही थी- चोद दे चोद दे, हरामी, अभी की माँ चोद दे। वो नीचे लेटी बोली। ‘हाँ अभिषेक से मेरा बदला लेना तो बनता है, मेरी फूल सी बच्ची को उसने बड़ी बदर्दी से रौंदा होगा।’ मैंने कहा। ‘जानते हो, उनकी सुहागरात पर मैंने तुम्हारी बेटी की हल्की हल्की चीखें अपने कमरे तक सुनी थी।’ वो बोली। ‘अच्छा, तो अब उसकी माँ की चीखें मैं उसके घर तक पहुँचाऊंगा।’ यह कह कर मैं उसे बड़ी बेदर्दी और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। मगर वो भी बड़ी ढीठ थी, मेरी पूरी ताकत से हो रहे हर वार को वो बड़ी खुशी से सह रही थी। मगर वो ज़्यादा देर इस सब को नहीं सह सकी, और वो मुझसे और कस के लिपट गई, हम दोनों के बदन पे आया पसीना एक दूसरे में घुल गया। उसने अपनी लंबी सी जीभ बाहर निकली जिसे मैंने अपने मुख में ले लिया और उसके साथ ही मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया। उसने अपनी बाहों और टाँगों के घेरे खोल दिये और बिल्कुल चित्त हो कर लेट गई, मैं भी उसके ऊपर से उतरा और उसकी साइड में ही नीचे फर्श पे लुढ़क गया। करीब 5-7 मिनट हम वैसे ही लेटे रहे, फिर दोनों उठ कर बाथरूम गए, अपने आप को साफ किया। ‘विनय, एक एक पेग और हो जाए!’ उसने कहा। ‘हाँ, ज़रूर, और पेग के बाद मुझे एक कुतिया को चोदना है।’ मैंने उसे आँख मार कर कहा। उसने मेरे लंड को पकड़ कर एक झटका दिया और बोली- मुझे भी आज तक सिर्फ मर्दों ने चोदा है, आज मैं भी किसी कुत्ते आदमी से चुदवाना चाहती हूँ।’ कह कर वो फिर से मुझसे चिपक गई।

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